Flight System Fail फ्लाइट सिस्टम "बेपटरी", हवाई अड्डों पर कतारें - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
February 28, 2026
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Flight System Fail फ्लाइट सिस्टम “बेपटरी”, हवाई अड्डों पर कतारें

इंडिगो की लगातार रद होती उड़ानों ने देशभर के एयरपोर्टों पर यात्रियों की चिंता, थकान और असहायता की तस्वीर उजागर कर दी है। आमतौर पर सुव्यवस्थित और समय पर उड़ानों के लिए जाने जाने वाले दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे हवाई अड्डों पर इस हफ्ते अब तक का सबसे लंबा इंतजार और अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला। यात्रियों की लंबी कतारें रातभर एयरपोर्ट पर खिंचती रहीं, बच्चे थककर फर्श पर लेट गए, बुजुर्गों ने व्हीलचेयर पर घंटों बैठकर सहारा ढूंढा, और ऑफिस जाने वाले या मेडिकल अपॉइंटमेंट के लिए यात्रा करने वाले लोगों की पूरी योजना बिखर गई। चार दिनों में 2,000 से ज्यादा उड़ानों के रद होने और रोजाना 500 से अधिक उड़ानों में देरी ने यात्रियों की परेशानियों को चरम पर पहुंचा दिया। यह स्थिति न केवल इंडिगो के ऑपरेशन की कमी को उजागर करती है, बल्कि उन लाखों लोगों की बेबसी का भी चेहरा दिखाती है, जो अपने जरूरी कामों और परिवार के लिए हर मिनट यह उम्मीद करते रहे कि शायद अगली घोषणा उनके नाम की होगी। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो के ऑपरेशन में लगातार पांचवें दिन शनिवार को भी कोई सुधार नहीं दिखा। देश के चार प्रमुख एयरपोर्टों और कई बड़े शहरों से शनिवार को 400 से अधिक उड़ानें कैंसिल की गईं। एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी। कहीं लोग अपने सामान के साथ फर्श पर बैठे हुए नजर आए, तो कहीं बच्चों को गोद में लेकर माता-पिता अपनी उड़ानों के बारे में लगातार पूछताछ कर रहे थे। यात्रियों की नाराजगी और थकान साफ नजर आ रही थी, जबकि एयरलाइन स्टाफ भी लगातार पूछताछ और शिकायतों का सामना करते हुए तनाव में दिखाई दिए। इस बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए केंद्र सरकार ने तत्काल कदम उठाया। सिविल एविएशन मंत्रालय ने इंडिगो को निर्देश दिया कि वह बिना किसी देरी के सभी लंबित पैसेंजर रिफंड को पूरा करे। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन यात्रियों के ट्रैवल प्लान फ्लाइट कैंसिल होने के कारण प्रभावित हुए हैं, उनके लिए कोई रीशेड्यूलिंग चार्ज नहीं लिया जाएगा। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि रिफंड में किसी भी प्रकार की देरी और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इंडिगो का ऑपरेशन लोगों के लिए परेशानी का कारण बना है, लेकिन लगातार पांचवें दिन भी उड़ानों का सिस्टम सुधार न होना और हजारों यात्रियों की योजनाओं के बाधित होने की स्थिति ने इसे और गंभीर बना दिया है। राजधानी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई के एयरपोर्ट पर रातभर यात्रियों की भीड़ देखी गई। लोग अपने बैग और जरूरी सामान के साथ इंतजार करते रहे, कहीं-कहीं तो लंबी कतारों के बीच धक्का-मुक्की भी नजर आई। यात्रियों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लगातार अपनी शिकायतें दर्ज कराई, जिससे इंडिगो और केंद्र सरकार दोनों पर दबाव बढ़ा। इस पूरे संकट के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बयान दिया कि नए पूर्ण ड्यूटी समय सीमा नियम 1 नवंबर से लागू हो चुके हैं, और इनमें किसी अन्य एयरलाइन को कोई परेशानी नहीं हुई है। इससे साफ है कि यह ऑपरेशन फेलियर केवल इंडिगो का है। उन्होंने यह भी कहा कि एयरलाइन की लापरवाही की पूरी जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई तय की जाएगी। सरकार ने पहले ही हवाई किराए पर लिमिट लागू की थी और कहा था कि अन्य एयरलाइंस को इसका कड़ाई से पालन करना होगा। यह लिमिट तब तक लागू रहेगी जब तक कि इंडिगो और पूरे एयरलाइन सिस्टम में स्थिरता नहीं आ जाती। पिछले चार दिनों में 2,000 से अधिक उड़ानों के रद्द होने के बाद, यात्रियों की नाराजगी चरम पर पहुंच गई। रोजाना औसतन 500 फ्लाइटें लेट हो रही हैं। यात्रियों ने बताया कि कई बार उन्हें अपने फिक्स्ड ट्रैवल प्लान के कारण मजबूरन इंतजार करना पड़ रहा है। कई छात्रों और नौकरीपेशाओं को इस स्थिति का सीधा असर पड़ा। कुछ लोगों ने एयरपोर्ट पर ही रात गुजारी, जबकि कुछ ने लंबी-लंबी कतारों में घंटों खड़े होकर अपनी फ्लाइट की जानकारी पाई। यह सिर्फ ऑपरेशनल समस्या नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों की जिंदगी में पैदा हुई असुविधा का भी संकेत है।

केंद्र सरकार ने इंडिगो को स्पष्ट निर्देश दिए, सभी लंबित रिफंड पूरे किए जाएं–

केंद्र सरकार ने इंडिगो को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित रिफंड 7 दिसंबर रात 8 बजे तक पूरे किए जाएं। इसके अलावा, यात्रियों से किसी प्रकार का रीशेड्यूलिंग चार्ज नहीं लिया जाएगा। यदि कोई एयरलाइन इस आदेश का पालन नहीं करती है, तो इसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इंडिगो की लापरवाही का पूरे सिस्टम पर असर पड़ा है और सरकार ने इसे लेकर सख्त रवैया अपनाया है। एयरपोर्ट पर स्थित कर्मचारी और प्रशासन भी यात्रियों की बढ़ती भीड़ और लगातार पूछताछ के बीच तनाव में दिखाई दिए। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए अधिकारियों ने कहा कि सिस्टम को जल्द स्थिर करना प्राथमिकता है। यह अव्यवस्था यह दिखाती है कि जब किसी बड़ी एयरलाइन का संचालन फेल होता है, तो पूरे देश में यात्रा प्रभावित होती है और आम लोगों की योजनाएं बाधित हो जाती हैं। इंडिगो के इस ऑपरेशन फेलियर ने यात्रियों की रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर असर डाला है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में लोगों ने सोशल मीडिया पर लगातार अपनी शिकायतें दर्ज कराई, एयरपोर्ट पर तनाव और अफरातफरी देखी गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि अब इंतजार की सीमा पूरी हो चुकी है, और एयरलाइन को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। यात्रियों को न केवल उनके पैसों का सही रिफंड मिलेगा, बल्कि किसी प्रकार की अतिरिक्त चार्जिंग से भी बचाया जाएगा। इस पूरी घटना ने यह भी दिखाया कि भारतीय हवाई अड्डे आमतौर पर सुव्यवस्थित और समयबद्ध रहते हैं, लेकिन जब किसी बड़ी एयरलाइन का सिस्टम फेल होता है, तो हवाई यात्रा में व्यवधान और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिलता है। इंडिगो की लगातार पांचवें दिन खराब ऑपरेशन स्थिति ने न केवल यात्रियों की नाराजगी बढ़ाई है, बल्कि एयरलाइन और सरकार दोनों पर भी दबाव डाला है। देश के एयरपोर्टों पर यह भीड़ और तनाव केवल ऑपरेशनल फेलियर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लाखों यात्रियों की बेबसी और थकान का भी सच है, जो हर घंटे यह सोचते रहे कि उनकी फ्लाइट कब उड़ेगी। सरकार ने स्पष्ट निर्देश और डेडलाइन तय कर दी है, लेकिन इंडिगो की लापरवाही ने यात्रियों की समस्याओं को बढ़ा दिया है। इस पूरे संकट ने यह भी उजागर किया है कि यात्रियों के हित में तत्काल और सख्त कदम उठाना कितना जरूरी है। इस तरह, इंडिगो की पांच दिनों से लगातार खराब ऑपरेशन स्थिति ने देशभर के एयरपोर्टों को हाहाकार की स्थिति में डाल दिया है। यात्रियों की परेशानी, लंबी कतारें, फ्लाइट कैंसिलेशन और लेट होने की संख्या ने हवाई यात्रा के सामान्य अनुभव को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे और जयपुर एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा असर देखा गया, जहां लंबी कतारों और फ्लाइट कैंसिलेशन के कारण यात्रियों का हाल बेहाल रहा। केंद्र सरकार ने सख्त हस्तक्षेप किया है और रिफंड डेडलाइन तय की है, लेकिन अब सवाल यह है कि इंडिगो कितनी जल्दी अपनी जिम्मेदारी निभा पाएगी और हवाई यात्रा में स्थिरता वापस ला पाएगी। यह संकट सिर्फ ऑपरेशन फेल का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय विमानन व्यवस्था, यात्रियों की सुरक्षा, समय की पाबंदी और एयरलाइन जिम्मेदारी का भी आईना है। इंडिगो के सिस्टम फेल और सरकार के अल्टीमेटम के बीच अब देशभर के हवाई अड्डे और यात्रियों की नजरें इस पर टिकी हैं कि कब तक यह स्थिति सामान्य होगी और कितनी जल्दी यात्रियों की परेशानियों का समाधान होगा।

नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा नए पूर्ण ड्यूटी समय सीमा नियम लगाने के बाद हुई स्थिति–

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों उड़ान बंद होने और देरी की समस्या से जूझ रही है। इसके पीछे कई मुख्य कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा लागू किए गए नए पूर्ण ड्यूटी समय सीमा नियम हैं। इन नियमों के तहत पायलट और क्रू के लिए ड्यूटी और आराम की सीमा तय की गई है। इससे इंडिगो को पूरे नेटवर्क में पर्याप्त क्रू उपलब्ध कराने में दिक्कत आई है। इसके अलावा, एयरलाइन ने नए नियम लागू होने के समय पायलट और कर्मचारी की योजना और रोस्टर समय पर अपडेट नहीं किया। परिणामस्वरूप कई उड़ानें बिना पायलट या क्रू के उड़ान भरने में असमर्थ रहीं।
तकनीकी खराबियां, हवाई अड्डों पर भीड़‑भाड़, मौसम की अस्थिरता और यात्रियों की अचानक बढ़ी मांग ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया। इन सभी कारणों के चलते इंडिगो की उड़ानों का समय पर संचालन प्रभावित हुआ है और यात्रियों को उड़ान बंद होने और देरी का सामना करना पड़ रहा है। इंडिगो की उड़ानों में अव्यवस्था के पीछे नए नियम, क्रू की कमी, तकनीकी व मौसम संबंधी समस्याएं और हवाई अड्डों पर दबाव मुख्य कारण हैं।

उत्तराखंड में इंडिगो की उड़ानों में अव्यवस्था, तीन फ्लाइट्स कैंसिल होने से परेशान यात्री–

उत्तराखंड में शनिवार को इंडिगो एयरलाइन ने अपनी तीन उड़ानें कैंसिल कर दी । इनमें देहरादून से दिल्ली, भुवनेश्वर और लखनऊ के लिए उड़ानें शामिल हैं। जौलीग्रांट एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस संबंध में जानकारी दी। देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट से इंडिगो की कुल 9 उड़ानें निर्धारित थीं, जिनमें से केवल एक उड़ान ही समय पर आ पाई है। यात्रियों को एयरलाइन की ओर से रिफंड और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सूचित किया गया है। इससे एयरपोर्ट पर यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। विशेषकर दिल्ली, भुवनेश्वर और लखनऊ जाने वाले यात्री अपनी उड़ानों के विलंब या कैंसिल होने के कारण तनाव में दिखे। एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि इंडिगो की इस स्थिति के कारण यात्रियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उन्हें समय-समय पर जानकारी प्रदान की जा रही है। इस बीच यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे उड़ान के समय और स्थिति की जानकारी के लिए इंडिगो की आधिकारिक वेबसाइट या एयरलाइन के कस्टमर केयर नंबर से लगातार अपडेट लेते रहें।

साल 2006 में शुरू होने वाली इंडिगो भारत की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन है–

इंडिगो की शुरुआत 4 अगस्त 2006 में हुई थी। इंटरग्लोब एविएशनके स्वामित्व वाली यह एयरलाइन आज भारत की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन बन चुकी है। देश के भीतर और विदेश के गंतव्यों तक इंडिगो की उड़ानें संचालित होती हैं। वर्तमान में इंडिगो का नेटवर्क लगभग 85 घरेलू और 32 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक फैला हुआ है। 2023 में इंडिगो पहली भारतीय एयरलाइन बनी जिसने 2,000 से अधिक रोज़ाना निर्धारित उड़ानें चलाने का रिकॉर्ड बनाया। इसी वर्ष, इंडिगो ने पहली बार एक कैलेंडर वर्ष में 1 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा दी। घरेलू हवाई यातायात में इंडिगो का बाजार हिस्सा 60‑65 प्रतिशत के आसपास है। यही कारण है कि इसे “घरेलू हवाई यात्रा की प्रमुख एयरलाइन” कहा जाता है। बावजूद इसके, लगातार पांचवें दिन खराब संचालन की स्थिति ने देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों की सुविधा, समयबद्धता और सुरक्षा को प्रभावित किया। देशभर के हवाई अड्डों पर यह दृश्य सिर्फ संचालन विफलता का संकेत नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की बेबसी का भी प्रतीक है, जो हर घंटे यह सोचते रहे कि उनकी उड़ान कब भरेगी। सरकार का स्पष्ट रुख और इंडिगो की जिम्मेदारी तय करना अब यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद बन गया है। यह घटना भारतीय विमानन व्यवस्था में जिम्मेदारी, पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर करती है।

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