ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी कर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। घोषणा पत्र में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता जताई गई। भारत के लिए इसे बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। सम्मेलन में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हुए। घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता जताते हुए वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा की सुचारु आवाजाही बनाए रखने पर जोर दिया गया। गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने की आवश्यकता भी बताई गई। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध का घोषणा पत्र में कोई जिक्र नहीं किया गया।
घोषणा पत्र के 40वें बिंदु में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक और किसी भी परिस्थिति में अनुचित है, चाहे उसका मकसद कुछ भी हो, वह कहीं भी हुआ हो या किसी के द्वारा किया गया हो। सदस्य देशों ने उस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। घोषणा पत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। आतंकवादियों, उन्हें समर्थन देने वालों और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति मजबूत करने का संकल्प लिया। घोषणा पत्र में ब्रिक्स आतंकवाद विरोधी कार्य समूह और उसके पांच उपसमूहों की गतिविधियों का स्वागत किया गया। आतंकवाद विरोधी सहयोग को और मजबूत करने तथा आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई गई। संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर भी जोर दिया गया। इससे ब्रिक्स की भूमिका केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रहकर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण होती दिख रही है।
घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर चिंता जताते हुए अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया गया। गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई। वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा की सुचारु आवाजाही बनाए रखने पर भी सदस्य देशों ने सहमति जताई।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत हुई। बैठक में भारत-चीन संबंधों को मजबूत बनाने, मतभेदों को विवाद नहीं बनने देने और दीर्घकालिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंध सम्मान, संवेदनशीलता और हित के तीन पारस्परिक सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन ने हमेशा भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाए रखने का समर्थन किया है। दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां अलग होने के बावजूद वे एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं। गलवान झड़प के बाद शी जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। दोनों नेताओं की बैठक को भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

