चारधाम यात्रा-2026 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में व्यापक निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस वर्ष यात्रा 19 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही है, ऐसे में सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं। अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा का शुभारंभ होगा, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ और 24 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाए। सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यात्रा संचालन में व्यावसायिक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने ग्रीन एवं क्लीन चारधाम यात्रा अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए यात्रा मार्गों को प्लास्टिक मुक्त बनाने, जगह-जगह कलेक्शन बॉक्स लगाने और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही चारधाम यात्रा को लेकर अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। हेली सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सभी हेलीकॉप्टरों की नियमित मेंटेनेंस और फिटनेस जांच अनिवार्य की जाए। ऑपरेशनल ओवरलोडिंग से बचने के लिए सेवाओं को समय-समय पर पर्याप्त विश्राम दिया जाए तथा निर्धारित मानकों का पूरी सख्ती से पालन किया जाए। मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने प्रमुख स्थलों पर सेल्फी प्वाइंट, थीम आधारित इंस्टॉलेशन और यात्रा मार्गों पर सौंदर्यीकरण कार्य तेज करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि यात्रा मार्गों पर गैस, पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
यात्रा मार्गों पर अधिकारियों को दैनिक मॉनिटरिंग करने के दिए निर्देश–
सीएम धामी ने जिला पूर्ति अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए यात्रा मार्गों पर पर्याप्त मेडिकल यूनिट्स, अस्थायी अस्पताल और एंबुलेंस तैनात करने के निर्देश दिए गए। पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सालयों की संख्या बढ़ाने तथा स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर शौचालय, विश्राम स्थल और शेल्टर की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दर्शन के लिए लंबा इंतजार न हो, इसके लिए स्लॉट मैनेजमेंट और भीड़ नियंत्रण प्रणाली प्रभावी रूप से लागू की जाए तथा रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाए। ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली को मजबूत करने, भीड़भाड़ वाले केंद्रों पर अतिरिक्त बूथ बढ़ाने और प्रक्रिया को सरल बनाने को कहा गया। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूरे यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रखने और आवश्यकता अनुसार एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने मुख्य मार्गों, चौराहों और बाजारों में पुलिस और होमगार्ड्स की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने को कहा। ट्रैफिक जाम रोकने के लिए सख्त ट्रैफिक प्लान लागू करने और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने के निर्देश दिए गए। आपदा प्रबंधन के तहत संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर संसाधनों की तैनाती करने तथा एसडीआरएफ और एनडीआरएफ को अलर्ट मोड में रखने को कहा गया। 24×7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ओवररेटिंग पर सख्ती करते हुए सभी दुकानों पर रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। पिछले वर्ष भंडारों को लेकर हुए विवादों का उल्लेख करते हुए प्रशासन को स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच समन्वय स्थापित कर स्थायी समाधान निकालने को कहा गया। परिवहन व्यवस्था को लेकर सभी वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र, ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड समय पर उपलब्ध कराने तथा सड़क मार्गों की स्थिति दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए गए। यात्रा मार्गों पर गड्ढों को तत्काल भरने और सड़क सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज (वर्चुअल माध्यम से), मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, संबंधित जिलों के जिलाधिकारी तथा अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यात्रा अवधि के दौरान नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से तैयारियों की निगरानी की जाए और आवश्यकता अनुसार सुधारात्मक कदम तुरंत लागू किए जाएं, ताकि चारधाम यात्रा-2026 श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुगम और बेहतर अनुभव वाली बन सके।
चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड में मेगा मॉक ड्रिल आयोजित—
उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए यात्रा मार्ग से जुड़े जिलों में व्यापक स्तर पर “मोंट्रियल एक्सरसाइज” के तहत मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास में आपदा प्रबंधन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरफ और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। अभ्यास के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, सड़क हादसों, हेलीकॉप्टर दुर्घटना, आग, बाढ़, भूस्खलन और भीड़ प्रबंधन जैसी कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को परखा गया। साथ ही हजारों यात्रियों के फंसने, संचार व्यवस्था ठप होने और सीमित संसाधनों के बीच त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने पर विशेष फोकस किया गया, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय को कम किया जा सके। चमोली जिले में बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर सबसे चुनौतीपूर्ण हालात तैयार किए गए। पागल नाला और गुंडाला क्षेत्र में भारी भूस्खलन और शूटिंग स्टोन की घटनाओं में हजारों यात्रियों के फंसने की स्थिति बनाई गई। बद्रीनाथ मंदिर क्षेत्र में भूकंप के बाद भगदड़, पुल से लोगों के नदी में गिरने और डूबने जैसी स्थितियों पर रेस्क्यू अभ्यास किया गया। इसके अलावा गौचर के पास बस दुर्घटना, जोशीमठ के होटल में आग और खराब मौसम के बीच जोशीमठ-बद्रीनाथ मार्ग पर 3000 से अधिक यात्रियों के फंसने की स्थिति में राहत कार्यों का अभ्यास हुआ। उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री और गंगोत्री मार्ग पर बादल फटना, फ्लैश फ्लड और ग्लेशियर झील फटने जैसी स्थितियों का अभ्यास किया गया। यमुनोत्री ट्रैक पर भूस्खलन में खच्चरों के गिरने और यात्रियों के घायल होने पर मेडिकल रेस्क्यू किया गया। पालीगढ़ क्षेत्र में बादल फटना और स्यानाचट्टी में नदी रुकने से झील बनने जैसी स्थिति में बाढ़ के खतरे से निपटने की रणनीति का परीक्षण किया गया। गंगोत्री क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के बाद शहर में तबाही और यात्रियों के फंसने की स्थिति में बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया गया। रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बादल फटना, फ्लैश फ्लड और ट्रेकिंग रूट टूटने की स्थिति बनाई गई। इसमें 400 से 500 यात्रियों के फंसे होने पर उनका रेस्क्यू करने का अभ्यास किया गया। फाटा और गौरीकुंड क्षेत्र में भूस्खलन, हेलीकॉप्टर दुर्घटना, बस हादसे और खराब मौसम के बीच 3000 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की रणनीति का परीक्षण किया गया। देहरादून जिले में मसूरी रोड पर सड़क हादसे और ट्रैफिक जाम में हजारों वाहनों के फंसने की स्थिति बनाई गई। डाकपत्थर बैराज पर अचानक जलस्तर बढ़ने से यात्रियों के बहने और फंसने की स्थिति में रेस्क्यू अभ्यास किया गया। ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में आग, भगदड़ और रेड अलर्ट के दौरान 5000 से अधिक यात्रियों के जमाव जैसी परिस्थितियों में प्रशासन की तैयारियों को परखा गया। हरिद्वार में हर की पौड़ी और रेलवे स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन का अभ्यास किया गया। गंगा घाट पर भगदड़ के दौरान यात्रियों के बहने की स्थिति बनाई गई, जबकि रेलवे स्टेशन पर अचानक भीड़ बढ़ने, सुरंग में ट्रेन फंसने और बम की अफवाह फैलने जैसे हालात में सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया का परीक्षण किया गया। पौड़ी जिले में बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे पर भूस्खलन से 300 से अधिक वाहनों के फंसने की स्थिति बनाई गई। श्रीनगर में होटल में आग, ट्रैफिक जाम और भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास हुआ। देवप्रयाग क्षेत्र में बांध से पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ जैसे हालात में यात्रियों को सुरक्षित निकालने की रणनीति पर काम किया गया। टिहरी जिले में चंबा-उत्तरकाशी मार्ग पर भूस्खलन और शूटिंग स्टोन से सड़क बंद होने पर 300 से अधिक वाहनों के फंसने का अभ्यास किया गया। कीर्तिनगर और मलेथा क्षेत्र में भारी ट्रैफिक जाम, तोता घाटी में सड़क हादसा और टिहरी बांध से पानी छोड़े जाने पर निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति में राहत अभियान चलाया गया। इस मेगा मॉक ड्रिल के माध्यम से चारधाम यात्रा के दौरान संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों का व्यापक परीक्षण किया गया। अलग-अलग जिलों में जमीनी स्तर पर आपदा की संभावनाएं बनाकर विभागों के आपसी समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखा गया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति में समय पर राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना और संभावित नुकसान को न्यूनतम रखना है।
Char Dham Yatra: चार धाम यात्रा को लेकर सीएम धामी ने की हाईलेवल मीटिंग, सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
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