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February 3, 2026
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बजट 2026: इनकम टैक्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं, रिवाइज्ड रिटर्न की तारीख बढ़ी; विदेश पैसा भेजना सस्ता



केंद्रीय बजट 2026 में इनकम टैक्स को लेकर आम करदाताओं को किसी बड़ी राहत या झटके का ऐलान नहीं मिला। टैक्स स्लैब और दरें पहले जैसी ही रखी गई हैं। हालांकि, सरकार ने टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने और कुछ प्रक्रियागत सुधारों से जुड़े अहम बदलाव जरूर किए हैं। रिवाइज्ड रिटर्न भरने की समयसीमा बढ़ाई गई है और विदेश पैसे भेजने पर लगने वाला टैक्स घटाया गया है।

टैक्स से जुड़े बजट 2026 के 5 बड़े बदलाव

1. 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स कानून
केंद्र सरकार पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लाने जा रही है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें टैक्स स्लैब या रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मकसद सिर्फ टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को सरल और कम जटिल बनाना है।

2. विदेश पैसे भेजने पर कम TCS
पढ़ाई और इलाज के लिए विदेश पैसे भेजने पर अब टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) 5% की जगह 2% लगेगा। इसके अलावा विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाले 5% और 20% के TCS रेट को भी घटाकर 2% कर दिया गया है, जिससे विदेश यात्रा करना सस्ता होगा।

3. TDS न कटवाने के लिए अब आवेदन की जरूरत नहीं
अगर आपकी इनकम टैक्स देनदारी नहीं बनती है, तो अब TDS कटवाने से बचने के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा। पहले इसके लिए फॉर्म 15G (60 साल से कम उम्र वालों के लिए) और फॉर्म 15H (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) जमा करना पड़ता था।

4. रिवाइज्ड रिटर्न की अंतिम तारीख बढ़ी
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में सुधार करने की आखिरी तारीख अब 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च कर दी गई है। मामूली फीस देकर करदाता अब वित्तीय वर्ष के अंत तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकेंगे।

5. फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग होगी महंगी
सरकार ने फ्यूचर ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया है। वहीं ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी।

टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं

पुरानी टैक्स रिजीम में अब भी 2.5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री है। सेक्शन 87A के तहत 5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स में छूट मिलती रहेगी।

नई टैक्स रिजीम में पहले की तरह 4 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं देना होगा। सेक्शन 87A के तहत सैलरीड व्यक्ति 12.75 लाख रुपये तक और अन्य करदाता 12 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं।

बदलाव क्यों नहीं किए गए?

टैक्स एक्सपर्ट आनंद जैन के मुताबिक, सरकार ने पिछले बजट में ही नई टैक्स रिजीम के तहत टैक्स छूट की सीमा 7 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी थी। ऐसे में इस साल टैक्स स्लैब में किसी बड़े बदलाव की संभावना पहले से ही कम थी।

पुरानी और नई टैक्स रिजीम से जुड़े अहम सवाल

सवाल 1: पुरानी और नई टैक्स रिजीम में क्या अंतर है?
नई टैक्स रिजीम में 4 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है, लेकिन इसमें निवेश से जुड़ी टैक्स छूट नहीं मिलती। वहीं पुरानी टैक्स रिजीम में कई तरह की डिडक्शन और छूट का फायदा लिया जा सकता है।

सवाल 2: पुरानी टैक्स रिजीम में कौन-कौन सी छूट मिलती है?
EPF, PPF, ELSS में निवेश, मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन का ब्याज और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश की रकम टैक्सेबल इनकम से घटाई जा सकती है।

सवाल 3: पुरानी टैक्स रिजीम किसके लिए बेहतर है?
जो लोग नियमित निवेश करते हैं और टैक्स छूट का पूरा फायदा लेना चाहते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स रिजीम बेहतर है। वहीं, कम टैक्स रेट और बिना डिडक्शन की झंझट वाली सरल व्यवस्था चाहने वालों के लिए नई टैक्स रिजीम ज्यादा उपयुक्त है।

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