उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को चुनावी मोड में लाने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी राम माधव और सह प्रभारी बांसुरी स्वराज व अरविंद मेनन शुक्रवार, 2 अक्टूबर को अपने दो दिवसीय संगठनात्मक प्रवास पर देहरादून पहुंचे। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद तीनों नेताओं का यह पहला विस्तृत संगठनात्मक दौरा है। तीनों नेताओं ने बलबीर रोड स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंचकर प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और अन्य प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ प्रदेश से लेकर जिला और बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
इस दौरे को भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी ने उत्तराखंड में एक प्रदेश प्रभारी के साथ दो सह प्रभारियों की नई व्यवस्था की है। राम माधव को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है, जबकि बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को सह प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले दुष्यंत कुमार गौतम उत्तराखंड के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नई टीम के सामने अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने के साथ संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की चुनौती है।
प्रदेश से बूथ तक संगठन की पड़ताल
शुक्रवार को हुई बैठक में प्रदेश के सभी मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी, जिला प्रभारी, सह प्रभारी और जिलाध्यक्ष शामिल हुए। बैठक में जिलावार संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी ली गई। खास तौर पर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि प्रदेश स्तर पर बनाई जा रही चुनावी रणनीति का असर जिलों, विधानसभा क्षेत्रों, मंडलों और बूथों तक कितना पहुंचा है। पार्टी के सामने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों को लेकर संगठन की स्थिति की समीक्षा का काम भी महत्वपूर्ण है। कमजोर माने जाने वाले क्षेत्रों और पिछली बार जिन सीटों पर भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, वहां संगठन की सक्रियता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैठकों में बूथ समितियों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भागीदारी, जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों और विभिन्न मोर्चों की भूमिका पर फीडबैक लिया जाना है। पार्टी यह भी देख रही है कि संगठन की कागजी तैयारियों और जमीनी सक्रियता के बीच कितना अंतर है। जिलाध्यक्षों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा स्तर पर आगे की रणनीति तय करने की दिशा में काम किया जाएगा।
दौरे के दौरान संगठन और सरकार के बीच समन्वय से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन और प्रभारी-सह प्रभारियों की बैठक भी प्रस्तावित है। इस बैठक में संगठन की स्थिति और आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा होनी है।
भाजपा की नई टीम के सामने केवल चुनावी कार्यक्रम तैयार करने का सवाल नहीं है, बल्कि संगठन की जमीनी स्थिति को समझना भी प्रमुख उद्देश्य है। पार्टी यह जानने की कोशिश करेगी कि किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन मजबूत है, कहां कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने की जरूरत है और किन क्षेत्रों में बूथ स्तर पर अतिरिक्त मेहनत की आवश्यकता है। पहाड़ और मैदान की अलग-अलग परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक स्थिति को भी फीडबैक में शामिल किया जा रहा है।
दूसरे दिन युवाओं और सातों मोर्चों पर फोकस
तीनों नेताओं का यह प्रवास दो दिन का है और 3 अक्टूबर को इसका दूसरा चरण होगा। सुबह सेवा संकल्प अभियान के तहत युवाओं से संवाद, पुरस्कार वितरण और आंगनबाड़ी केंद्र के दौरे का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके बाद दोपहर में भाजपा के सातों मोर्चों के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक होगी। इसमें युवा, महिला, किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक मोर्चे की संगठनात्मक सक्रियता और आगामी चुनाव में उनकी भूमिका पर चर्चा होगी।
बांसुरी स्वराज ने देहरादून में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उत्तराखंड में भाजपा की लगातार तीसरी सरकार बनाने का संकल्प भी दोहराया है। उन्होंने डाट काली मंदिर में मन्नत मांगने की बात कही और कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारी में जुटने का संदेश दिया।
दरअसल, भाजपा ने सितंबर में संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राम माधव, बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद प्रदेश महामंत्री संगठन के पद पर फणीन्द्रनाथ शर्मा की नियुक्ति भी की गई। इस तरह पार्टी ने 2027 के चुनाव से पहले प्रदेश संगठन के प्रमुख दायित्वों पर नई टीम तैयार कर दी है।
अब राम माधव और उनकी टीम के दो दिवसीय दौरे को इसी नई संगठनात्मक व्यवस्था की पहली बड़ी जमीनी समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। बैठकों से मिलने वाला फीडबैक आगे विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार तैयारियों का आधार बनेगा। यानी भाजपा की नजर अब केवल प्रदेश मुख्यालय की रणनीति पर नहीं, बल्कि बूथ तक संगठन की वास्तविक सक्रियता पर है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह दौरा पार्टी के अगले संगठनात्मक रोडमैप की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

