Uttarakhand DIPR
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October 9, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने प्रकोष्ठों का किया विस्तार, 14 नेताओं को मिली सह-संयोजक की जिम्मेदारी



सामाजिक और व्यावसायिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कवायद, कई जिलों को संगठन में प्रतिनिधित्व उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने संगठन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक समूहों के बीच अपनी गतिविधियों को विस्तार देने के लिए अलग-अलग प्रकोष्ठों में 14 नेताओं को सह-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी है। ये नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की सहमति के बाद की गई हैं। इससे पहले भी भाजपा 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक ढांचे में विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां तय कर चुकी है। नई जिम्मेदारियों के तहत सांस्कृतिक, शिक्षक, प्रबुद्ध, महिला एवं स्वयं सहायता समूह, लघु उद्योग, खेलकूद, चिकित्सा, सेवानिवृत्त कर्मचारी, पूर्व सैनिक, आर्थिक और दिव्यांग प्रकोष्ठों में नेताओं को जोड़ा गया है। पार्टी की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के बीच संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए इन प्रकोष्ठों को जिम्मेदारी दी जाती है। नियुक्तियों में देहरादून महानगर के साथ पौड़ी, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, ऊधमसिंह नगर, उत्तरकाशी और चमोली जैसे जिलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे संगठन में क्षेत्रीय भागीदारी बढ़ाने के साथ अलग-अलग वर्गों के बीच समन्वय को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा की ओर से हाल के महीनों में संगठनात्मक जिलों के प्रभारियों और सह-प्रभारियों के साथ प्रदेश कार्यसमिति में भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। पार्टी ने 19 सांगठनिक जिलों में प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं, जबकि नई प्रदेश कार्यसमिति में भी विभिन्न जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत भाजपा का संगठनात्मक फोकस बूथ स्तर तक गतिविधियों को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों से संवाद बढ़ाने पर है। हालिया संगठनात्मक बैठकों में भी चुनाव की तैयारियों, संगठन को सक्रिय करने और विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की गतिविधियों को बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई है। नई नियुक्तियों के बाद संबंधित प्रकोष्ठों में गतिविधियों को गति देने और उनके माध्यम से सामाजिक, पेशेवर तथा विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी संगठन में लगातार जिम्मेदारियां तय कर रही है, जिससे प्रदेश से लेकर जिला और स्थानीय स्तर तक प्रकोष्ठों की भूमिका को अधिक सक्रिय किया जा सके।

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