September 6, 2026
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EWS Reservation supreme court : बड़ी खबर: सामान्य वर्ग के लिए “10% आरक्षण” देने पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, मोदी सरकार के ईडब्ल्यूएस प्रावधान को सही माना

सामान्य वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला देते हुए 10 फीसदी आरक्षण पर अपनी मुहर लगा दी है। हालांकि पांच जजों की बेंच में से दो ने इसके खिलाफ फैसला सुनाया जबकि 3 ने अपनी मंजूरी दे दी। यानि अब 3-1 का यह फैसला है। उनके खिलाफ जाने से भी इस फैसले पर असर नहीं पड़ेगा। बता दें कि केंद्र सरकार ने संविधान में संशोधन कर सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए EWS आरक्षण को बरकरार रखा है। 5 जजों की बेंच में 3 जजों ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण के प्रावधान को सही माना। EWS के पक्ष में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने फैसला सुनाया है। उन्होंने आगे कहा कि 103वां संशोधन वैध है। जबकि जस्टिस रविंद्र भट्ट ने EWS आरक्षण पर असहमति जताई। चीफ जस्टिस यूयू ललित भी सरकार के 10% आरक्षण के खिलाफ रहे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार की भी जीत मानी जा रही है। केंद्र की ओर से पेश तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुनवाई के दौरान कहा था कि आरक्षण के 50% बैरियर को सरकार ने नहीं तोड़ा। उन्होंने कहा था- 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने ही फैसला दिया था कि 50% से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए ताकि बाकी 50% जगह सामान्य वर्ग के लोगों के लिए बची रहे। यह आरक्षण 50% में आने वाले सामान्य वर्ग के लोगों के लिए ही है। यह बाकी के 50% वाले ब्लॉक को डिस्टर्ब नहीं करता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 103वें संविधान संशोधन कर EWS आरक्षण लागू किया था। ये व्यवस्था 2019 में यानी पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने लागू की थी और इसके लिए संविधान में 103वां संशोधन किया गया था। 2019 में लागू किए गए ईडब्लूएस कोटा को तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके समेत कई याचिकाकर्ताओं ने इसे संविधान के खिलाफ बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी। आखिरकार, 2022 में संविधान पीठ का गठन हुआ और 13 सिंतबर को चीफ जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस दिनेश महेश्वरी, जस्टिस रवींद्र भट्ट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पादरीवाला की संविधान पीठ ने सुनवाई शुरू की थी। केंद्र सरकार ने मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा कि, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए ‘‘पूरी तरह से स्वतंत्र’’ आरक्षण को खत्म किए बिना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को पहली बार सामान्य वर्ग की 50 प्रतिशत सीटों में से दाखिले और नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है, क्योंकि इसे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत कोटे में हस्तक्षेप किए बिना दिया गया है।

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