कल ‘भारत बंद’ का एलान : लेबर कोड से लेकर OPS और NEP तक सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल बैंक, स्कूल और ऑफिस 12 फरवरी को भारत बंद के दौरान क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
August 6, 2026
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कल ‘भारत बंद’ का एलान : लेबर कोड से लेकर OPS और NEP तक सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल बैंक, स्कूल और ऑफिस 12 फरवरी को भारत बंद के दौरान क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद


केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ देशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा होने जा रहा है। 10 से ज्यादा ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों ने 12 फरवरी को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। यूनियनों का दावा है कि इस बार हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हो सकते हैं, जो इसे अब तक की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाई बना सकता है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, 9 जुलाई 2025 के प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ लोगों ने भाग लिया था और इस बार उससे भी अधिक भागीदारी की संभावना है। यूनियनों का कहना है कि यह आंदोलन केवल मजदूरों का नहीं, बल्कि किसानों, कृषि मजदूरों, छात्रों और युवाओं का भी साझा संघर्ष है। 600 से अधिक जिलों में बंद का असर पड़ने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह दायरा लगभग 550 जिलों तक सीमित था। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) समेत कई संगठनों ने इस बंद को समर्थन देते हुए केंद्र की नीतियों को “मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक” करार दिया है।

क्यों बुलाया गया भारत बंद? क्या हैं प्रमुख मांगें?


ट्रेड यूनियनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों से नौकरी की सुरक्षा घटेगी और श्रमिकों की सौदेबाजी की ताकत कम होगी। इसलिए वे इन लेबर कोड को तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं।


प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. चारों लेबर कोड की वापसी
    मजदूर संगठनों का मानना है कि नए कानून श्रमिक हितों के खिलाफ हैं और इन्हें निरस्त किया जाना चाहिए।
  2. मनरेगा (MGNREGS) को मजबूत करना
    ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के बजट में बढ़ोतरी और कार्यदिवस बढ़ाने की मांग की गई है।
  3. सिविल सर्विस नीतियों का विरोध
    कुछ नई प्रशासनिक नीतियों को सिविल सेवाओं को कमजोर करने वाला बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की गई है।
  4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना
    नई पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
  5. नई शिक्षा नीति (NEP 2020) की वापसी
    शिक्षा नीति 2020 को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया है।
  6. इसके अलावा, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताई है। किसान संगठनों का आरोप है कि इससे कृषि क्षेत्र और छोटे किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
  7. किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?
    यूनियनों ने सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी संस्थानों को हड़ताल की नोटिस दी है। जिला और ब्लॉक स्तर पर अभियान भी चलाए गए हैं।

संभावित असर इस प्रकार हो सकता है:

  1. सरकारी बैंक और बीमा कार्यालय
    कुछ राज्यों में राज्य परिवहन बस सेवाएं
    सरकारी दफ्तर और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां।
  2. औद्योगिक इकाइयां और मैन्युफैक्चरिंग हब
    कोयला, स्टील और अन्य प्रमुख सेक्टर (स्थानीय भागीदारी पर निर्भर)
    विरोध वाले इलाकों में मनरेगा के तहत कार्य
    यूनियनों का दावा है कि भाजपा शासित राज्यों में भी बंद का असर देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से ओडिशा और असम में व्यापक प्रभाव की संभावना जताई गई है।
  3. किन सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर?
    अस्पताल और इमरजेंसी सेवाएं
    एंबुलेंस और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं
    मेट्रो सेवाएं (स्थानीय प्रशासन के निर्णय पर निर्भर)
    प्राइवेट ऑफिस और आईटी कंपनियां
    स्कूल और कॉलेज (राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर)
    दूध, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति
    कुल मिलाकर, 12 फरवरी का भारत बंद श्रम और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। अब देखना होगा कि यह बंद कितना व्यापक असर डालता है और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

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