पांच राज्यों के चुनाव से पहले कृषि कानूनों को खत्म कर पीएम मोदी ने किसानों को मनाया तो विपक्ष की रणनीति पर फेरा पानी - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
March 3, 2026
Daily Lok Manch
राजनीतिक राष्ट्रीय

पांच राज्यों के चुनाव से पहले कृषि कानूनों को खत्म कर पीएम मोदी ने किसानों को मनाया तो विपक्ष की रणनीति पर फेरा पानी

मौका भी था दस्तूर भी, पांच राज्यों के चुनाव दहलीज पर भी हैं, किसानों की नाराजगी के साथ विपक्ष के पास मुद्दा भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही  मास्टर स्ट्रोक से देश के करोड़ों किसानों को खुश कर दिया वहीं विपक्षी नेताओं के पास विधानसभा चुनाव में केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में बैठे थे उनकी भी सियासी रणनीति को कमजोर कर पानी फेर दिया। फिलहाल विपक्ष नए सिरे से मोदी सरकार को घेरने में जुट गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर किसी ने सोचा नहीं होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फैसले से चौंका देंगे। शुक्रवार सुबह जब घड़ी की सुई में 9 बजे थे तब  पीएम मोदी ने देश को संबोधित करने का अचानक फैसला किया। प्रधानमंत्री के इस संबोधन को लेकर देशवासी सोच भी नहीं रहे थे कि तीनों कृषि कानून को वापस लेने का फैसला करने जा रहे हैं। जब पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान कहा कि पारित किए गए तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएंगे सुनकर किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। 1 साल 2 महीने 2 दिन बाद प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार का फैसला पलट दिया। केंद्र सरकार के इस कृषि कानून के खिलाफ देशभर के किसान पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने यह कृषि बिल वापस लेने का फैसला तब किया जब वे आज से उत्तर प्रदेश में तीन दिन के दौरे पर हैं। पीएम बुंदेलखंड के महोबा और झांसी का दौरा करेंगे। वे शुक्रवार शाम लखनऊ आएंगे। यहां वे 20-21 नवंबर को पुलिस मुख्यालय में होने वाली डीजीपी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री के इस फैसले के बाद किसानों में खुशी का माहौल है तो समूचा विपक्ष निशाना साधते हुए मोदी सरकार की हार बता रहा है। आइए अब जान लेते हैं प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए किसानों और कृषि कानून को लेकर क्या कहा । 

पीएम मोदी ने कहा हम किसानों को समझा नहीं पाए, मैं देशवासियों से क्षमा मांगता हूं–

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मैं देशवासियों से क्षमा मांगते हुए यह कहना चाहता हूं कि हमारी तपस्या में कोई कमी रह गई होगी। उन्होंने कहा कि कुछ किसान भाइयों को समझा नहीं पाए। आज गुरुनानक देव का पवित्र पर्व है। ये समय किसी को दोष देने का समय नहीं है। पूरे देश को यह बताने आया हूं कि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू कर देंगे। (बता दें कि इसे महीने की 29 नवंबर को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है उसी में मोदी सरकार यह तीनों कृषि बिल को वापस लेने के लिए कानून में संशोधन करेगी।) प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने किसानों की बातों और उनके तर्क को समझने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। जिन कानूनों पर ऐतराज था उनको समझाने में सरकार ने भरपूर कोशिश की। इसके साथ ही पीएम मोदी ने आंदोलन पर बैठे लोगों को प्रकाश पर्व पर अपने घर वापस जाने की अपील की। बता दें कि तीनों नए कृषि कानून 17 सितंबर 2020 को संसद से पास कराया गया था। इसके बाद से लगातार किसान संगठनों की तरफ से विरोध कर इन कानूनों को वापस लेने की मांग की जा रही थी। किसान संगठनों का तर्क था कि इस कानून के जरिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को खत्म कर देगी और उन्हें उद्योगपतियों के रहमोकरम पर छोड़ देगी। जबकि सरकार का तर्क था कि इन कानूनों के जरिए कृषि क्षेत्र में नए निवेश का अवसर पैदा होगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता के बाद भी इस पर सहमति नहीं बन पाई। किसान दिल्ली की सीमाओं के आसपास आंदोलन पर बैठकर इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 

पांच राज्यों में चुनाव और किसानों की नाराजगी से भाजपा की बढ़ी हुई थी चिंता–

बता दें कि चंद महीनों में होने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर किसानों की भाजपा सरकार के प्रति नाराजगी बनी हुई थी । कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन से अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए चिंता बढ़ गई थी। चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में बीजेपी के लिए किसान आंदोलन एक बड़ी चुनौती बन गया था।गौरतलब है कि पंजाब में अकाली दल कृषि कानून के चलते ही बीजेपी से गठबंधन तोड़कर अलग हो गई थी। किसान आंदोलन के चेहरा बन चुके राकेश टिकैत खुलकर भारतीय जनता पार्टी को वोट से चोट देने का एलान कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर किसान आंदोलन के चलते पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के इलाके में बीजेपी का समीकरण गड़बड़ाया नजर आ रहा था। कृषि कानून के खिलाफ पंजाब से ही किसान आंदोलन शुरू हुआ था, जिसके चलते बीजेपी नेताओं को गांव में एंट्री तक नहीं मिल पा रही थी। पंजाब की राजनीति किसानों के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। राज्य में कृषि और किसान ऐसे अहम मुद्दे हैं कि कोई भी राजनीतिक दल इन्हें नजरअंदाज कर अपना वजूद कायम रखने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। वहीं कृषि कानून के चलते यूपी में किसान आंदोलन बीजेपी की सत्ता में वापसी की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी। सबसे अधिक पश्चिम उत्तर प्रदेश में कृषि कानून को लेकर भाजपा का विरोध देखा जा रहा था। ‌जाट समुदाय से लेकर गुर्जर, सैनी जैसी तमाम किसान जातियां कृषि कानून की वजह से भाजपा से पूरी तरह दूरी बनाए हुए थे। पीएम मोदी के तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने पर पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत पूरे देश भर के किसानों में खुशी का माहौल है। दिल्ली समेत कई स्थानों पर किसानों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया है और प्रधानमंत्री के इस फैसले का स्वागत किया है।

Related posts

बड़ी खबर : भाजपा सांसद ने दिया इस्तीफा, इस पार्टी के साथ शुरू की अपनी नई सियासी पारी

admin

भाजपा हाईकमान ने छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया, इस नेता को दी नई जिम्मेदारी

admin

Cyclone Biporjoy Tornado Landfall VIDEO : “दिखाई देने लगा महातूफान”- बढ़ी दहशत : समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरों के साथ राउंड लेते हुए गुजरात के तटों पर टकराने को तैयार, तीन घंटे बाद बिपरजॉय दिखाएगा खौफनाक मंजर, चेतावनी के बाद भी लोग सेल्फी लेने के लिए खतरनाक घटनास्थल पर डटे हैं, देखें वीडियो

admin

Leave a Comment