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October 5, 2026
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राष्ट्रीय

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले ऋषिकेश में भारतीय सेना के जवानों ने विशेष योग शिविर का किया आयोजन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले ऋषिकेश में गंगा नदी के पवित्र तट पर स्थित नीम बीच, तपोवन आमखाला में भारतीय सेना के जवानों के लिए एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम योग गुरु और आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अमृत राज द्वारा संचालित किया गया, जो आरोग्यधाम रिट्रीट (मां योग आश्रम) से जुड़े हैं।

इस शिविर में रायवाला मिलिट्री स्टेशन, जिसे लोकप्रिय रूप से 6 माउंटेन ब्रिगेड के नाम से जाना जाता है, के अधिकारियों और जवानों ने हिस्सा लिया। इनके साथ एनसीसी कैडेट्स भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

योग नगरी ऋषिकेश में आयोजित इस सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।

डॉ. अमृत राज ने प्रतिभागियों को अपनी दैनिक दिनचर्या में योग और आयुर्वेद को शामिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने के महत्व पर जोर देते हुए स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं।

योग के आध्यात्मिक पहलू पर बात करते हुए डॉ. अमृत राज ने कहा कि हमारा सबसे बड़ा प्रश्न “मैं कौन हूं?” है और इसका उत्तर खुद को दिव्य, प्रसन्न, शांत और आनंदमय आत्मा के रूप में पहचानने में छिपा है।

यह शिविर 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का हिस्सा था।

इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने 21 जून को होने वाले 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले हरियाणा विधानसभा परिसर में आयोजित योग प्रोटोकॉल ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया।

यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की वार्षिक वैश्विक तैयारियों के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगान और हरियाणा के आधिकारिक राज्य गीत के साथ हुई।

सभा को संबोधित करते हुए नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था, तब दुनिया ने भारत की इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया था। उन्होंने बताया कि उस समय 170 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग को मिला वैश्विक समर्थन केवल एक प्रस्ताव का समर्थन नहीं था, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और विरासत को मिला सम्मान भी था।

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