रिटायरमेंट का नाम आते ही आम आदमी के मन में सबसे पहले सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भर जीवन की चिंता उभरती है। नौकरी या व्यवसाय के सक्रिय वर्षों के बाद जब नियमित आमदनी रुक जाती है, तब पेंशन और बचत ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा बनती है। इसी भावनात्मक और आर्थिक जरूरत को समझते हुए सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस को लगातार मजबूत किया है। वर्ष 2025 इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जब केंद्र सरकार और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने एनपीएस में 10 बड़े सुधार लागू कर इसे ज्यादा सुरक्षित, लचीला और आम आदमी के अनुकूल बना दिया। सबसे बड़ा बदलाव निवेश विकल्पों के विस्तार के रूप में सामने आया है। अब एनपीएस निवेशकों को इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को लेकर पहले से ज्यादा स्पष्ट और संतुलित विकल्प मिल रहे हैं, जिससे वे अपनी उम्र और जोखिम क्षमता के अनुसार बेहतर निर्णय ले सकें। इसके साथ ही फंड आवंटन की प्रक्रिया को भी सरल किया गया है, ताकि निवेशक बिना जटिलता के अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकें। दूसरा अहम सुधार निकासी से जुड़े नियमों में किया गया है। अब आंशिक निकासी को ज्यादा आसान और व्यावहारिक बना दिया गया है। शिक्षा, इलाज, घर निर्माण या अन्य जरूरी परिस्थितियों में एनपीएस खाताधारक को अपने ही धन तक पहुंचने के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। यह बदलाव एनपीएस को जीवन की वास्तविक जरूरतों से जोड़ता है। तीसरा बड़ा बदलाव कर लाभों से जुड़ा है। सरकार ने एनपीएस में निवेश पर मिलने वाली टैक्स छूट को और स्पष्ट किया है, जिससे नौकरीपेशा लोगों के साथ-साथ स्वरोजगार करने वाले भी बिना भ्रम के इस योजना का लाभ उठा सकें। इससे नियमित बचत और दीर्घकालीन निवेश को बढ़ावा मिला है। चौथा महत्वपूर्ण सुधार पेंशन यानी एन्युटी विकल्पों में किया गया है। 2025 में निवेशकों को अधिक एन्युटी विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे रिटायरमेंट के बाद अपनी जरूरतों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के अनुसार मासिक पेंशन तय कर सकें। इससे आय की स्थिरता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। पांचवां बदलाव डिजिटल सुविधाओं को लेकर किया गया है। एनपीएस खाता खोलने, योगदान जमा करने, फंड बदलने और स्टेटमेंट देखने की प्रक्रिया को पूरी तरह सरल और ऑनलाइन बनाया गया है। इससे युवाओं के साथ-साथ दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की भागीदारी भी बढ़ी है। छठा सुधार पेंशन फंड मैनेजरों की जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा है। निवेशकों को अब अपने निवेश के प्रदर्शन की समय-समय पर स्पष्ट जानकारी मिल रही है, जिससे वे सूझबूझ के साथ फैसले ले सकें। इससे एनपीएस पर भरोसा और मजबूत हुआ है।
सातवां बड़ा बदलाव वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने के रूप में सामने आया है। उनके लिए दस्तावेजी औपचारिकताओं को कम किया गया है, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। आठवां सुधार स्वैच्छिक योगदान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। अब निवेशक अतिरिक्त आय या बोनस मिलने पर आसानी से अतिरिक्त राशि एनपीएस में जमा कर सकते हैं, जिससे भविष्य की पेंशन को और मजबूत बनाया जा सके। नौवां बदलाव असंगठित क्षेत्र के लोगों को ध्यान में रखकर किया गया है। छोटे व्यापारियों, स्वरोजगार करने वालों और अस्थायी रोजगार से जुड़े लोगों के लिए नियमों को ज्यादा लचीला बनाया गया है, ताकि वे भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकें। दसवां और अंतिम बड़ा बदलाव यह है कि एनपीएस को एक समग्र सामाजिक सुरक्षा योजना के रूप में विकसित किया गया है, जहां निवेश, निकासी, पेंशन और पारदर्शिता चारों पहलुओं को संतुलित किया गया है। इसका उद्देश्य हर नागरिक को सम्मानजनक और सुरक्षित रिटायरमेंट प्रदान करना है।
कुल मिलाकर, 2025 में एनपीएस में किए गए ये 10 बड़े बदलाव इस योजना को सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि भविष्य की चिंता से मुक्त होने का भरोसेमंद आधार बनाते हैं। बदलते समय और बढ़ती महंगाई के दौर में एनपीएस अब करोड़ों लोगों के लिए आर्थिक सुरक्षा की मजबूत ढाल बनकर उभरा है।
रिटायरमेंट योजना को लेकर युवाओं में भी बढ़ रही रुचि–
निजी क्षेत्र में काम करने वाले युवा कर्मचारी, छोटे कारोबारी और स्वरोजगार से जुड़े लोग अक्सर यह सोचकर पेंशन योजनाओं से दूरी बनाए रखते थे कि ये स्कीमें जटिल हैं और लंबे समय तक पैसा फंसा रहता है। 2025 में एनपीएस में किए गए सुधारों के बाद यह धारणा तेजी से बदलती नजर आ रही है। डिजिटल प्रक्रिया के सरल होने से अब एनपीएस खाता खोलना कुछ ही मिनटों का काम रह गया है। मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश, फंड चयन और जानकारी हासिल करना आसान हुआ है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि 25 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं में एनपीएस को लेकर रुचि बढ़ी है। कई युवा इसे अब सिर्फ रिटायरमेंट योजना नहीं, बल्कि दीर्घकालीन वित्तीय सुरक्षा का मजबूत आधार मानने लगे हैं। आंशिक निकासी के नियम आसान होने से लोगों का डर भी कम हुआ है। अब उन्हें लगता है कि जरूरत पड़ने पर उनका पैसा पूरी तरह लॉक नहीं रहेगा। यही वजह है कि असंगठित क्षेत्र और छोटे कारोबारियों में भी एनपीएस को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है। कुल मिलाकर, 2025 के बदलावों ने एनपीएस को एक सीमित वर्ग की योजना से निकालकर आम लोगों की जरूरतों से जोड़ दिया है।

