देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में हाल ही में सामने आए पेपर लीक मामले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी इंजीनियरिंग, फार्मेसी और अन्य संस्थानों के शिक्षकों से प्रश्नपत्र तैयार नहीं कराए जाएंगे। इसके बजाय प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए नई और अधिक सुरक्षित प्रणाली लागू की जाएगी, जिसका मसौदा अंतिम चरण में है।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, पेपर लीक की घटना के बाद परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा की गई है। समीक्षा में पाया गया कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी गोपनीयता बनाए रखने की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्र निर्माण की जिम्मेदारी सीमित और अधिक विश्वसनीय विशेषज्ञों को देने की योजना बनाई गई है।
नई व्यवस्था में प्रश्नपत्र तैयार करने वालों का चयन पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। साथ ही डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड दस्तावेज, सीमित पहुंच और प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन जैसी व्यवस्थाओं को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लीक की आशंका न रहे।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और परीक्षा की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नई परीक्षा प्रणाली को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इसे आगामी परीक्षाओं से पहले लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि पेपर लीक की घटना के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। इसके बाद सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार का फैसला लिया। अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।

