दूरदर्शन की पूर्व समाचार एंकर सरला माहेश्वरी का आज निधन हो गया। उनके परिवारिक मित्र शम्मी नारंग ने उनके निधन की जानकारी सभी को दी। माहेश्वरी 71 वर्ष की थीं और 1980 और 1990 के दशक में टीवी समाचार जगत के सबसे जाने-माने चेहरों में से एक थीं।
उन्होंने 1976 से 2005 तक दूरदर्शन पर समाचार वाचिका के रूप में कार्य किया था। माहेश्वरी उस दौर में दूरदर्शन की जानी-मानी समाचार वाचिका थीं, जब प्रसारण पूरे दिन में कुछ ही घंटों तक सीमित था। नारंग ने ‘एक्स’ और इंस्टाग्राम पर इस खबर की जानकारी देते हुए पोस्ट किया।नारंग ने कहा कि दूरदर्शन में मेरी पूर्व सह-समाचार प्रस्तोता सरला माहेश्वरी के निधन की जानकारी देते हुए मुझे अत्यंत पीड़ा हो रही है।उन्होंने माहेश्वरी को ”शिष्टता और विनम्रता की साक्षात प्रतिमूर्ति के रूप में याद किया। नारंग ने सोशल मीडिया मंच पर पोस्ट किया कि मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि दूरदर्शन में मेरी पूर्व सह-समाचार प्रस्तोता सरला माहेश्वरी का निधन हो गया है… वह न केवल दिखने में सुंदर थीं बल्कि हृदय से भी कहीं अधिक उदार थीं, भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी और वह ज्ञान का भंडार थीं।
दूरदर्शन नेशनल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दूरदर्शन परिवार की ओर से श्रीमती सरला माहेश्वरी को भावभीनी श्रद्धांजलि। वह दूरदर्शन की एक सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचिका थीं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में एक विशेष स्थान बनाया था। उनकी सादगी, संयम और व्यक्तित्व ने दर्शकों के दिलों में गहरा विश्वास अर्जित किया।
सरला माहेश्वरी जी को उनके अंदाज के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनकी आवाज और खबर पढ़ने के अंदाज में एक अलग ही शांति और भरोसा होता था जो दर्शकों को अपनी तरफ खींच लेता था। सरला ने उस दौर में समाचार पढ़ने को एक संस्कारी और सम्मानित पहचान दी। ये वो वक्त था जब एंकर ही खबर की विश्वसनीयता हुआ करते थे।
सोशल मीडिया और परिवार की सूत्रों की मानें तो टहलने के दौरान गिरने से उनकी मौत हो गई। जानकारी ये भी मिली है कि वह लंबे समय से पार्किंसंस बीमारी से पीड़ित चल रहीं थीं. बताते चलें कि पार्किंसंस बीमारी में मस्तिष्क के एक हिस्से (सबस्टैंशिया नाइग्रा) में डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं। इससे शरीर में कंपकंपी (कांपना), मांसपेशियों में अकड़न आ जाती है। साथ ही इसकी वजह से लोग धीरे-धीरे चलने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि संतुलन बिगड़ने की संभावना रहती है। साथ ही इसकी वजह से कई बार बोलने-लिखने में दिक्कत जैसी समस्याएं होती हैं। परिवार की सूत्रों के मुताबिक टहल कर घर लौटते समय गिरकर उनकी मौत हो गई।

