August 20, 2026
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ट्रंप प्रशासन का नया ‘पब्लिक चार्ज’ नियम, ग्रीन कार्ड चाहने वाले प्रवासियों की बढ़ी मुश्किलें

अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की कोशिश कर रहे प्रवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने ‘पब्लिक चार्ज’ नियम के दायरे को व्यापक करते हुए सरकारी सुविधाओं पर निर्भरता को ग्रीन कार्ड आवेदन के मूल्यांकन में अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। नए नियम का असर भारतीय प्रवासियों समेत उन आवेदकों पर पड़ सकता है, जो अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया में हैं।

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) का नया नियम 18 सितंबर से प्रभावी होगा। इसके तहत अधिकारियों को यह आकलन करने का अधिकार होगा कि कोई आवेदक भविष्य में सरकार की आर्थिक या अन्य सहायता पर निर्भर हो सकता है या नहीं।

अब तक ‘पब्लिक चार्ज’ के तहत मुख्य रूप से दो तरह की सरकारी सुविधाओं को आवेदन खारिज करने के आधार के रूप में देखा जाता था। इनमें गुजारा चलाने के लिए मिलने वाली नकद सरकारी सहायता और सरकार के खर्च पर लंबे समय तक किसी संस्थान में रहने जैसी सुविधाएं शामिल थीं। नए नियम में सरकारी सहायता के दायरे को काफी विस्तृत किया गया है।

USCIS अधिकारियों के मूल्यांकन में आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, वित्तीय स्थिति और शैक्षणिक योग्यता जैसे कारक शामिल होंगे। इसके अलावा आवेदक के परिवार या आश्रितों द्वारा प्राप्त की जा रही कुछ सरकारी सुविधाओं को भी निर्णय के दौरान ध्यान में रखा जा सकता है।

नए नियम के तहत नकद सहायता, आवास संबंधी सहायता, मुफ्त राशन, शिक्षा या कॉलेज के लिए मिलने वाली वित्तीय मदद जैसी सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल भी अधिकारियों के मूल्यांकन का हिस्सा बन सकता है। यदि अधिकारी को लगता है कि आवेदक भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकता है, तो उससे ‘पब्लिक चार्ज बॉन्ड’ जमा करने के लिए भी कहा जा सकता है।

यह बदलाव गृह सुरक्षा विभाग द्वारा बाइडन प्रशासन के 2022 में लागू किए गए ‘पब्लिक चार्ज’ नियम को समाप्त करने के बाद आया है। नया नियम 18 सितंबर या उसके बाद डाक से भेजे जाने अथवा ऑनलाइन जमा किए जाने वाले फॉर्म I-485 पर लागू होगा।

आव्रजन कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, नए प्रावधान USCIS अधिकारियों को ग्रीन कार्ड आवेदनों का मूल्यांकन करते समय पहले की तुलना में अधिक व्यापक अधिकार देते हैं। ऐसे में अमेरिका में स्थायी निवास की उम्मीद कर रहे भारतीय और अन्य प्रवासियों को नए नियमों के तहत अपनी वित्तीय और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

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