11 मासूम बच्चों की हंसी यादों में रह गई - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
February 12, 2026
Daily Lok Manch
राष्ट्रीय

11 मासूम बच्चों की हंसी यादों में रह गई





मासूम बच्चों की हंसी अब सिर्फ यादों में रह गई। मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 नन्हे अनमोल खांसी की दवा ‘कोल्डरिफ’ कफ सिरप के कारण ही अपनी जान गंवा बैठे। यह दर्दनाक घटना न केवल परिवारों के लिए अपूरणीय नुकसान लेकर आई है, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। स्वास्थ्य सुरक्षा में चूक और दवा में मिलावट ने इन मासूम बच्चों की जिंदगी छीन ली। माता-पिता का दर्द और समाज की चिंता हर किसी के हृदय को झकझोर रही है। इस हादसे ने स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा, दवा की गुणवत्ता और सख्त नियामक निगरानी कितना जरूरी है। इस घटना ने देशभर के नागरिकों को चेताया है कि कभी भी स्वास्थ्य और सुरक्षा के मामलों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया इलाके में यह सिलसिला शुरू हुआ, जहां साधारण सर्दी-खांसी के इलाज के लिए दी गई ‘कोल्डरिफ’ सिरप ने नौ मासूमों की जिंदगी छीन ली। ये बच्चे, जो वायरल फीवर से जूझ रहे थे, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से मिली इस दवा के बाद अचानक किडनी फेलियर का शिकार हो गए। मृतकों में से कम से कम पांच ने कोल्डरिफ सिरप का सेवन किया था, जबकि एक ने नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप लिया था। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक मां, जिसकी दो साल की बेटी की मौत हो गई, बताती हैं, “वह इतनी मासूम थी, बस खांसी थी। डॉक्टर ने सिरप दिया, लेकिन अगले ही दिन वह हमसे हमेशा के लिए दूर हो गई। यह दर्द केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हर आंसू में समाया हुआ है। राजस्थान में भी यही कहर बरपा। भरतपुर और सीकर जिलों में दो और बच्चों की मौत हो चुकी है। एक पांच साल का लड़का, जो सिकार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सिरप लेकर आया, कुछ घंटों में ही दर्द से तड़पने लगा। उसके माता-पिता ने बताया कि सिरप पीने के बाद उसके पेट में दर्द शुरू हो गया, पेशाब बंद हो गया और अंततः किडनी फेल हो गई। भरतपुर में दो साल के बच्चे की हालत इतनी बिगड़ी कि उसे जयपुर के अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन वहां भी बच नहीं सका। इन घटनाओं ने राजस्थान सरकार को हिलाकर रख दिया। राज्य की मुफ्त दवा योजना के तहत वितरित सिरप पर सवाल उठे हैं। एक डॉक्टर ने तो सिरप की सुरक्षा साबित करने के लिए खुद ही इसे पी लिया, लेकिन वह बेहोश हो गया, जो दवा की खतरनाक प्रकृति का संकेत देता है। परिवारों में गुस्सा और शोक का माहौल है। पिता कहते हैं, “हमने भरोसा किया था सरकार की दवा पर, लेकिन यह विश्वासघात साबित हुआ। मेरे बच्चे की आंखें बंद हो गईं, लेकिन दोषियों को सजा कब मिलेगी?” जांच के दौरान पता चला कि सिरप में डायएथिलीन ग्लायकॉल जैसे जहरीले रसायन की मिलावट हो सकती है, जो किडनी को नष्ट कर देता है। यह वही रसायन है जो पहले भी कई देशों में बच्चों की मौत का कारण बना, जैसे 2022 में गाम्बिया में 70 बच्चों की मौत। मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल कोल्डरिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ‘अत्यंत दुखद’ बताते हुए कंपनी के अन्य उत्पादों पर भी रोक लगाने का ऐलान किया। राजस्थान में डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप की आपूर्ति रोक दी गई। तमिलनाडु ने भी कोल्डरिफ पर बैन लगा दिया और नमूने जांच के लिए भेजे। केंद्र सरकार की स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सलाह जारी की कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दें। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की टीम ने सैंपल इकट्ठा किए, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों में कुछ सैंपलों में कोई विषाक्त पदार्थ नहीं मिला, जो रहस्य को और गहरा करता है। फिर भी, व्यापक जांच जारी है, जिसमें पानी, मच्छर और अन्य कारकों की पड़ताल हो रही है। यह घटना भारत की दवा उद्योग की कमजोरियों को उजागर करती है। नकली और मिलावटी दवाओं का बाजार फल-फूल रहा है, जहां सस्ते विकल्पों के चक्कर में जानें दांव पर लगाई जा रही हैं। कफ सिरप बच्चों के लिए जरूरी नहीं, प्राकृतिक उपचार जैसे भाप और हाइड्रेशन पर्याप्त हैं। लेकिन अभिभावक अक्सर डॉक्टरों के पर्चे पर भरोसा करते हैं, बिना गुणवत्ता जांचे। समाज को अब जागना होगा। माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए, दवाओं के ब्रांड और बैच नंबर की जांच करनी चाहिए। सरकार को सख्त कानून लागू करने होंगे, जैसे निर्यात से पहले गुणवत्ता प्रमाणन अनिवार्य। यह त्रासदी केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि टूटे परिवारों की कहानी है। उन मासूमों की आत्मा को शांति मिले, और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, यही प्रार्थना है। देश को एकजुट होकर स्वास्थ्य सुरक्षा की दीवार मजबूत करनी होगी, ताकि कोई मां-बाप फिर से अपने लाल की हंसी खोने का दर्द न सहें।



तमिलनाडु सरकार ने ‘कोल्डरिफ’ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया–



मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद, तमिलनाडु सरकार ने ‘कोल्डरिफ’ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सिरप में डाईएथिलीन ग्लायकॉल की मात्रा अनुमेय सीमा से अधिक पाई है, जो कि अत्यधिक विषैला रसायन है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 9 बच्चों की मौत के बाद, राज्य सरकार ने सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। जांच में पाया गया कि सिरप में डाईएथिलीन ग्लायकॉल की मात्रा 48.6% थी, जबकि अनुमेय सीमा 0.1% है।
राजस्थान सरकार ने भी इस सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी है और निर्माता कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है। औषधि नियंत्रक को निलंबित कर दिया गया है और जयपुर स्थित कंपनी केसन्स फार्मा द्वारा निर्मित सभी 19 दवाओं का वितरण रोक दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं न दी जाएं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सतर्क रहने और सभी संभावित खतरनाक बैचों को तुरंत पकड़ने का निर्देश भी दिया है। इस हादसे ने स्पष्ट कर दिया है कि दवा की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा पर कभी भी समझौता नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने कहा कि सख्त नियामक निगरानी, गुणवत्तापूर्ण निर्माण प्रक्रियाएं और उपभोक्ताओं में जागरूकता आवश्यक हैं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासद घटनाओं से बचा जा सके। यह घटना यह दर्शाती है कि दवा की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा पर कभी भी समझौता नहीं किया जा सकता। प्रशासन और चिकित्सकों को चाहिए कि वे बच्चों को दवाएं देते समय पूरी सतर्कता बरतें और किसी भी संदिग्ध दवा से बचें।

Related posts

अति दुखद : घाटी में आतंकियों के साथ जारी मुठभेड़ में भारतीय सेना के दो कैप्टन, एक मेजर और एक जवान शहीद, एक आतंकी भी मारा गया, एनकाउंटर जारी

admin

एशिया की पहली महिला लोको पायलट सुरेखा यादव ने वंदे भारत एक्सप्रेस का किया संचालन, रेल मंत्री ने ट्वीट कर दी बधाई

admin

यह रहेंगी आज की प्रमुख खबरें

admin

Leave a Comment