Uttarakhand DIPR
Uttarakhand DIPR
November 5, 2026
Daily Lok Manch
राष्ट्रीय

महिलाओं-बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त होगी कार्रवाई, देश में 850 फास्ट ट्रैक अदालतों को केंद्र सरकार ने की मंजूरी



महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देशभर में 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) को मजबूत करने और उनके विस्तार की मंजूरी दे दी गई है। सरकार का उद्देश्य बलात्कार और बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा कर पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना और अपराधियों को जल्द सजा सुनिश्चित करना है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देश में वर्तमान में संचालित 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी। इन अदालतों में पॉक्सो अधिनियम और बलात्कार से संबंधित मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। सरकार का मानना है कि विशेष अदालतों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और पीड़ितों को लंबे समय तक न्याय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र सरकार निर्भया फंड से 2,353.15 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। वहीं, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से 1,434.89 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी दी जाएगी। इस प्रकार योजना के संचालन और विस्तार के लिए बड़े स्तर पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष सरकारी वकील और छह सहायक कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इससे अदालतों में सुनवाई की प्रक्रिया व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से यौन अपराधों से जुड़े संवेदनशील मामलों में मुकदमों की सुनवाई के दौरान पीड़ितों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। सरकार ने अदालतों में पीड़ितों के अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत बच्चों और महिलाओं की मानसिक स्थिति तथा उनके साथ हुए आघात को ध्यान में रखते हुए बाल अनुकूल अदालतों की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्र भी बनाए जाएंगे, ताकि पीड़ितों और गवाहों को सामान्य अदालती माहौल के दबाव से बचाया जा सके। इससे विशेषकर बच्चों को बिना किसी अतिरिक्त मानसिक तनाव के अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। इस पूरी योजना की निगरानी केंद्रीय कानून मंत्रालय का न्याय विभाग करेगा। इसके लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा और नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। इनके माध्यम से अदालतों के कामकाज, मामलों की सुनवाई और निस्तारण की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। केंद्र सरकार का यह फैसला महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को गति देने और पीड़ितों को जल्द न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Comment