उत्तराखंड सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्गों के कल्याण को लेकर कई योजनाएं संचालित की हैं। सरकार का जोर वृद्धजनों को आर्थिक सहायता के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित योजनाओं के तहत बुजुर्गों को पेंशन, स्वास्थ्य जांच और जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
वृद्धजनों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से वृद्धावस्था पेंशन योजना में भी बदलाव किया गया है। अब पात्र पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन का लाभ मिल रहा है। योजना के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र पति-पत्नी को प्रतिमाह ₹1,500-₹1,500 की पेंशन दी जा रही है। इस तरह पात्र बुजुर्ग दंपति को हर महीने कुल ₹3,000 की राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से पहुंचती है।
पहले वृद्धावस्था पेंशन योजना में परिवार के केवल एक सदस्य को ही पेंशन का लाभ मिलने की व्यवस्था थी। ऐसे में पति या पत्नी में से किसी एक को ही आर्थिक सहायता मिल पाती थी। नियम में बदलाव के बाद पात्र दोनों बुजुर्गों को पेंशन मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति को सहारा मिलने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर भी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को चश्मा, व्हीलचेयर, वॉकिंग स्टिक, ट्राइपॉड, सुनने की मशीन और नकली दांत जैसे सहायक उपकरण निशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
इसके अलावा 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को आयुष्मान भारत और राज्य स्वास्थ्य योजना के माध्यम से उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। निशुल्क स्वास्थ्य जांच और मोतियाबिंद शिविरों के जरिए भी वरिष्ठ नागरिकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य बुजुर्गों को उम्र के इस पड़ाव में आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत देना तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।विकल्प 2
उत्तराखंड में बुजुर्गों के लिए बढ़ा सहारा, पेंशन से लेकर मुफ्त इलाज तक कई सुविधाएं
देहरादून। उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। आर्थिक सहायता से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक सरकार का फोकस वृद्धजनों की जरूरतों को पूरा करने पर है। इसी क्रम में वृद्धावस्था पेंशन योजना में बदलाव करते हुए पात्र पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन देने की व्यवस्था की गई है।
अब 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र बुजुर्ग पति-पत्नी को प्रतिमाह ₹1,500-₹1,500 की पेंशन मिल रही है। यानी पात्र दंपति को हर महीने कुल ₹3,000 की राशि प्राप्त होती है। यह रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है। इससे उन बुजुर्ग दंपतियों को आर्थिक मदद मिल रही है, जिनके लिए नियमित आय का कोई अन्य साधन नहीं है।
इससे पहले वृद्धावस्था पेंशन योजना में परिवार के केवल एक सदस्य को पेंशन का लाभ मिलता था। पति या पत्नी में से किसी एक के नाम पर ही पेंशन स्वीकृत होने की व्यवस्था थी। अब पात्रता पूरी करने वाले दोनों पति-पत्नी को अलग-अलग पेंशन मिलने से बुजुर्ग दंपतियों को अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिल रहा है।
राज्य सरकार की ओर से बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर भी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को उनकी आवश्यकता के अनुसार चश्मा, व्हीलचेयर, चलने के लिए छड़ी, ट्राइपॉड, सुनने की मशीन और नकली दांत जैसे सहायक उपकरण निशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
इसके साथ ही बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य जांच और मोतियाबिंद शिविर भी लगाए जा रहे हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत और राज्य स्वास्थ्य योजना के तहत निशुल्क और कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से वृद्धजनों की देखभाल और सामाजिक सुरक्षा के लिए वृद्धाश्रम एवं देखभाल केंद्र तथा सहायता हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे जीवन के इस पड़ाव में सम्मान के साथ रह सकें।

