Uttarakhand माणा गांव के केशव प्रयाग में 12 वर्षों बाद पुष्कर कुंभ का आयोजन शुरू, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, यहां पर महर्षि वेदव्यास ने तपस्या करते हुए महाभारत की रचना की - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
July 26, 2026
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Uttarakhand माणा गांव के केशव प्रयाग में 12 वर्षों बाद पुष्कर कुंभ का आयोजन शुरू, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, यहां पर महर्षि वेदव्यास ने तपस्या करते हुए महाभारत की रचना की


उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के बीच चमोली जिले की सीमा पर स्थित माणा गांव में गुरुवार, 15 मई को मिनी कुंभ जैसी है एक धार्मिक तस्वीर देखने को मिली। गांव माणा के केशव प्रयाग में 12 वर्षों बाद विधि विधान के साथ पुष्कर कुंभ का आयोजन शुरू हो गया है। जिसे लेकर बदरीनाथ धाम के साथ ही माणा गांव में बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की आवाजाही बढ़ गई है। पुष्कर कुंभ के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन के साथ पुलिस प्रशासन की ओर से यहां तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि माणा गांव के केशव प्रयाग में आयोजित पुष्कर कुंभ को लेकर पैदल मार्ग का सुधारीकरण किया गया है। यहां पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न भाषाओं में साइन बोर्ड लगाए गए हैं। इसके साथ ही कुंभ के सुचारु संचालन के लिए जहां पैदल मार्ग पर पुलिस की तैनाती की गई है, वहीं संगम तट पर एसडीआरएफ के जवानों की तैनाती भी की गई है। उन्होंने बताया कि तहसील प्रशासन को पुष्कर कुंभ के आयोजन को लेकर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए नियमित मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि, चमोली जिले की सीमा पर स्थित गांव माणा में 12 वर्ष बाद पुष्कर कुंभ का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब 12 वर्ष में बृहस्पति ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करता है, तो माणा गांव स्थित अलकनंदा और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित केशव प्रयाग में पुष्कर कुंभ का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में मुख्य रुप से दक्षिण भारत के वैष्णव मतावलम्बी प्रतिभाग करते हैं।


हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माणा गांव के पास स्थित केशव प्रयाग में महर्षि वेदव्यास ने तपस्या करते हुए हिन्दू धर्म के पौराणिक ग्रंथ महाभारत की रचना की थी। यह भी कहा जाता है कि दक्षिण भारत के महान आचार्य रामानुजाचार्य और माध्वाचार्य ने इसी स्थान पर मां सरस्वती से ज्ञान प्राप्त किया था। जिसके चलते अपनी पौराणिक परंपराओं के संरक्षण के लिए बदरीनाथ धाम के समीप स्थित माणा गांव पहुंच कर केशव प्रयाग में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं।
इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि तीर्थ स्थल न केवल हमारी धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि ये देश की एकता और सांस्कृतिक एकजुटता के भी प्रतीक हैं। विभिन्न स्थानों से आने वाले श्रद्धालु इन स्थलों पर एकत्र होकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करते हैं। इसी क्रम में माणा गांव में आयोजित पुष्कर कुंभ, उत्तर को दक्षिण से जोड़ रहा है।

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