उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक निर्णय लेते हुए पौड़ी जिले के डोभ (श्रीकोट) स्थित सरकारी नर्सिंग कॉलेज का नाम दिवंगत अंकिता भंडारी के नाम पर रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इस कॉलेज का नाम अब “स्वर्गीय अंकिता भंडारी सरकारी नर्सिंग कॉलेज डोभ (श्रीकोट), पौड़ी” कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में इसकी औपचारिक जानकारी दी गई है।
सरकार के इस फैसले को सामाजिक संवेदनशीलता, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और स्मृति-संरक्षण के रूप में देखा जा रहा है। अंकिता भंडारी का मामला पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय रहा था। इस घटना ने समाज को झकझोर दिया था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में सरकार का यह कदम न केवल अंकिता की स्मृति को सम्मान देने का प्रयास है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि राज्य सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है।इस संबंध में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने गुरुवार को एक आधिकारिक आदेश जारी किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले भी कई मंचों से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस नामकरण के निर्णय को उसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि अंकिता के नाम पर शैक्षणिक संस्थान का नामकरण आने वाली पीढ़ियों को संवेदनशीलता, न्याय और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देगा।
डोभ (श्रीकोट) स्थित यह सरकारी नर्सिंग कॉलेज पौड़ी जिले का एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य शिक्षण संस्थान है, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। कॉलेज का नाम बदलने से स्थानीय स्तर पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह फैसला अंकिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है और इससे समाज में यह संदेश जाएगा कि गलत के खिलाफ आवाज उठाने वालों को भुलाया नहीं जाता।
राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि नाम परिवर्तन की सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और अब कॉलेज का नाम सभी सरकारी अभिलेखों, बोर्डों और शैक्षणिक दस्तावेजों में नए नाम से दर्ज किया जाएगा। जल्द ही कॉलेज परिसर में नए नाम का शिलापट्ट भी स्थापित किया जाएगा।
इस फैसले को महिला सशक्तिकरण और न्याय के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय की सराहना की है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम समाज में भरोसा कायम करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि सरकार केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी फैसले ले रही है।
कुल मिलाकर, अंकिता भंडारी के नाम पर सरकारी नर्सिंग कॉलेज का नामकरण उत्तराखंड सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें स्मृति, सम्मान और सामाजिक संदेश को प्राथमिकता दी गई है। यह निर्णय लंबे समय तक प्रदेश की सामाजिक चेतना में अपनी छाप छोड़ने वाला माना जा रहा है।

