उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देवभूमि की डेमोग्राफी और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए हमारी सरकार संकल्पित है। पिछली सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में लैंड जिहाद किया गया।
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लैंड जिहाद एक सुनियोजित षड्यंत्र है, इसके तहत ‘नीली, पीली और हरी चादर चढ़ाकर’ सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया। हमने इसके खिलाफ नियमों के अनुसार अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। हमने पहले ही लोगों को चेतावनी दी। कुछ लोगों ने अतिक्रमण छोड़ा, लेकिन कुछ जगहों पर प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटवाया गया।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमने उत्तराखंड में 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करवाया है। डेमोग्राफी के असंतुलन और देवस्थान को बदनाम करने वालों के खिलाफ भी हमने अभियान चलाया है और वेरिफिकेशन ड्राइव भी चलाई गई। उत्तराखंड में 2003 के बाद परिवार रजिस्टर में कई नाम जोड़े गए हैं। हमने हाल ही में एक निर्णय लिया है कि सभी जिलों के परिवार रजिस्टर को एक जगह सील कर दिया जाए। उनकी जांच करवाई जाएगी।
मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने पर उन्होंने कहा कि हम अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार का कानून लेकर आए हैं। अल्पसंख्यक समाज के अंदर सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई लोगों को भी इसमें लाया गया है। अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार को लेकर लाए गए कानून से इन्हें भी फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि मदरसों का नाम कुछ और है, पढ़ाई कुछ और हो रही है। काम कुछ और हो रहा है। बाहर से कुछ और दिखाई देता है, लेकिन संदिग्ध लोग पकड़े जाते हैं। पहचान छुपाकर लोगों को शरण दी जाती है। यहां के लोगों में आधुनिक शिक्षा दिखाई नहीं देती है। आधुनिक शिक्षा पढ़ाई जानी चाहिए। हमने तय किया है कि एक जुलाई 2026 के बाद ऐसे मदरसे बंद कर दिए जाएंगे, जिनमें उत्तराखंड सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाए जाएंगे। 250 से अधिक अवैध मदरसों को हमने बंद कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम देवभूमि के अंदर 500 साल पुरानी कट्टरवादी मानसिकता वाली शिक्षा या कबीलाई मानसिकता को पनपने नहीं देंगे। हमने शिक्षा और ज्ञान के मंदिर स्थापित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि जब हमने आयुष्मान योजना शुरू की थी तो हमें अनुमान था कि इसका खर्च 100 से 200 करोड़ का आएगा, लेकिन ये कई सौ करोड़ पहुंच गया है। जब हमने इसकी समीक्षा की तो आंकड़े चौंकाने वाले आए हैं। एसआईआर चल रहा है, लेकिन हम अपने स्तर पर पहले से ही सत्यापन शुरू करवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि साफ और सुथरी होनी चाहिए। हमारा मकसद किसी को टारगेट करना नहीं है।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जब आप कोई काम करते हैं, तो आकलन करके करते हैं। मैंने देवभूमि के हित के लिए कदम उठाया। देवभूमि के भविष्य को सवारना चाहता हूं। आने वाली पीढ़ियों के लिए साफ सुथरा उत्तराखंड बनाना चाहता हूं। बच्चों को मैं असुरक्षित भविष्य नहीं देना चाहता हूं। इसलिए मुझे लगता है कि अतिक्रमण हटाने और धर्म के हिसाब से काम करने के लिए भगवान की भी कृपा होती है। बड़ों का भी आशीर्वाद होता है। हमने नियमों के अनुसार काम किया है।
उन्होंने बताया कि 600 से अधिक ढांचे ऐसे बने हुए थे, जो सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बने थे। देहरादून में एक पुरानी मजार थी, लेकिन उसके नीचे कुछ भी नहीं था। ऐसे 600 जगहों की पहचान की गई। वह सिर्फ जमीनों को अतिक्रमण करने के लिए बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि देवभूमि के देवत्व को हम कोई नुकसान नहीं होने देंगे। उसके लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, हम उसे उठाएंगे। हम ऐसा कर भी रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। पूरे भारत समेत पूरी दुनिया के लोग चाहते हैं कि देवभूमि का अस्तित्व किसी कीमत पर खराब नहीं होना चाहिए। इसकी अब हमारी जिमेदारी है।

