पितृ पक्ष के अंतिम दिन पितृ विसर्जन अमावस्या के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए तर्पण किया। इस दौरान उन्होंने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया तथा उनके आशीर्वाद की कामना की।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमारे पूर्वज हमारी जड़ों, संस्कारों और जीवन-मूल्यों के आधार हैं। उनके प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करना सनातन परंपरा का अभिन्न अंग है। पूर्वजों के योगदान और उनके दिए संस्कारों को याद करना हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति आभार व्यक्त करने और परिवार की परंपराओं को सम्मान देने का विशेष अवसर है। इस दौरान तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है।
मुख्यमंत्री ने पूर्वजों की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रार्थना की कि उनका स्नेह, पुण्य और आशीर्वाद सदैव सभी पर बना रहे। उन्होंने इस अवसर को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़े मूल्यों के स्मरण का अवसर बताया।
पितृ विसर्जन अमावस्या के साथ ही पितृ पक्ष का समापन होता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर पूर्वजों का स्मरण, तर्पण और दान-पुण्य करने से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। देशभर में श्रद्धालु इस दिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

