नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित CJP के संसद मार्च के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। जंतर-मंतर से संसद की ओर कूच करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसके बाद कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और हिंसक घटनाएं सामने आईं। पुलिस के अनुसार अब तक 70 लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं हैं। पुलिस हिंसा के पीछे किसी संगठित साजिश की भी जांच कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान जनपथ क्षेत्र में कई दुकानों में तोड़फोड़ की गई। पथराव और झड़पों में पांच से अधिक आईपीएस अधिकारी सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पुलिस का कहना है कि संसद मार्च के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद सुबह करीब नौ बजे से जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने लगे। अनुमान के अनुसार लगभग 10 हजार लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया और हालात बिगड़ने पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिंसा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे संदेशों और भड़काऊ पोस्ट की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस के अनुसार पाकिस्तान स्थित विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल से इस घटनाक्रम को लेकर लगातार पोस्ट और टिप्पणियां की जा रही हैं। इसलिए जांच में इस पहलू को भी शामिल किया गया है कि कहीं अफवाह फैलाने या माहौल बिगाड़ने की कोई सुनियोजित कोशिश तो नहीं हुई। पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक तथा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा बढ़ती बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी पर सरकार से जवाब शामिल हैं।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले कहा था कि संगठन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संसद मार्च करना चाहता है और किसी भी प्रकार की हिंसा या कानून व्यवस्था बिगाड़ने का समर्थन नहीं करता। उनका कहना था कि आंदोलन का उद्देश्य केवल युवाओं की आवाज संसद तक पहुंचाना है और किसी को भी आंदोलन को बदनाम करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।
इस बीच 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखीं। उन्होंने मांग की कि सरकार शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे। दूसरी शर्त के तहत CJP के प्रतिनिधिमंडल को संसद जाकर अपनी बात रखने की अनुमति दी जाए और सांसद इस मुद्दे को सदन में उठाने का भरोसा दें। तीसरी शर्त में कहा गया कि यदि स्वास्थ्य कारणों से वह स्वयं संसद नहीं जा सकते हैं तो सांसद सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उन्हें यही आश्वासन दें।
घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से भी प्रतिनिधियों की मुलाकात हुई। मुलाकात के दौरान परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की चिंताओं पर विचार करने और संबंधित विषयों पर उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का भरोसा दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय की अपेक्षा जता रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है। डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने, जुलूस निकालने और बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन करने पर रोक रहेगी। हालांकि प्रशासन की पूर्व अनुमति मिलने पर जंतर-मंतर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (जनसंपर्क) राजीव रंजन ने सभी प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने, कानून का पालन करने और पुलिस के साथ सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी गैरकानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल होने से बचें, अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर पुलिस और प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है तथा हिंसा से जुड़े सभी मामलों की जांच जारी है।

