कभी शहर की भीड़भाड़ भरी सड़कों पर ऑटो रिक्शा चलाकर रोज़ी-रोटी कमाने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा आज देश के आसमान में अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रहे हैं। यह कहानी सिर्फ एक सफल कारोबारी बनने की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है, जिसने हालात को मात देकर सपनों को उड़ान दी। शंख एयरलाइंस के रूप में श्रवण कुमार विश्वकर्मा अब भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहे हैं।

श्रवण कुमार विश्वकर्मा का जीवन शुरुआती दौर में अभावों से भरा रहा। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ा। परिवार का सहारा बनने के लिए उन्होंने ऑटो चलाना शुरू किया। सुबह से देर रात तक सड़कों पर सफर कराते हुए उन्होंने सिर्फ किराया नहीं कमाया, बल्कि लोगों की जरूरतें, समय की कीमत और भरोसे का महत्व भी समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनके कारोबारी सफर की नींव बना।
उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने संघर्ष को बहुत करीब से देखा है। कानपुर जैसे औद्योगिक और मेहनतकश शहर में पले-बढ़े श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने बचपन से ही कामकाजी जीवन की सख्ती को महसूस किया। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने खुद को मजबूत बनाया और हालात से समझौता करने के बजाय आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
संघर्ष के दिनों में श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने हार नहीं मानी। छोटी-छोटी बचत से उन्होंने पहले परिवहन और फिर अन्य व्यवसायों में कदम रखा। जोखिम उठाए, नुकसान भी झेले, लेकिन सीखते रहे। सड़क परिवहन से जुड़े अनुभव ने उनके भीतर यह सोच पैदा की कि भारत जैसे विशाल देश में कनेक्टिविटी ही विकास की असली कुंजी है। यहीं से उनके मन में हवाई सेवा शुरू करने का सपना जन्मा।
इसी सोच का परिणाम है शंख एयरलाइंस, जो देश की नई घरेलू एयरलाइन के रूप में शुरू होने जा रही है। कंपनी का लक्ष्य सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि छोटे और मझोले शहरों को भी हवाई नेटवर्क से जोड़ना है। श्रवण कुमार विश्वकर्मा का मानना है कि हवाई यात्रा आम आदमी की पहुंच से बाहर नहीं होनी चाहिए। उनकी एयरलाइन किफायती किराए, समयबद्ध उड़ानों और बेहतर सेवा पर फोकस करेगी।
शंख एयरलाइंस आधुनिक और ईंधन-किफायती विमानों के साथ परिचालन की योजना बना रही है। सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही एयरलाइन से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिसमें पायलट, केबिन क्रू, ग्राउंड स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
श्रवण कुमार विश्वकर्मा अक्सर कहते हैं कि ऑटो चलाने के दिनों ने उन्हें जमीन से जोड़े रखा। उन्हीं दिनों की सीख आज उनके फैसलों में झलकती है। वे मानते हैं कि अगर एक ऑटो चालक अपने सपनों पर विश्वास कर सकता है, तो देश का हर युवा आगे बढ़ सकता है।
शंख एयरलाइंस की यह उड़ान सिर्फ एक कारोबारी पहल नहीं, बल्कि उन करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संघर्ष की धूल से उठकर आसमान छूने का हौसला रखते हैं।
कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा
श्रवण कुमार शंख एयर के फाइंडर और चेयरमैन (shankh airlines owner) हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखते हैं। मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे श्रवण बताते हैं कि पढ़ाई में उनका मन ज्यादा नहीं लगता था। दोस्ती-यारी और हालात ऐसे रहे कि जल्दी ही पढ़ाई छूट गई। इसके बाद उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे खुद को खड़ा किया। उनका पहला बड़ा काम सरिया (TMT) का बिजनेस था। इसके बाद उन्होंने सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हाथ आजमाया। ट्रकों का बड़ा बेड़ा खड़ा किया और यहीं से उनकी कारोबारी पहचान बनी।श्रवण कुमार ने खुद बताया है कि उन्होंने न सिर्फ टेंपो में सफर किया, बल्कि दोस्तों के टेंपो खुद चलाए भी हैं। श्रवण कुमार के मुताबिक, “नीचे से ऊपर आने वाला आदमी साइकिल, बस, ट्रेन, टेंपो सब कुछ देखता है।” यही अनुभव आज उनकी सोच की सबसे बड़ी ताकत बना।
एयरलाइन का आइडिया कैसे आया?
करीब 3-4 साल पहले श्रवण कुमार के मन में कुछ अलग करने का जुनून आया। उनका मानना था कि एविएशन आने वाले समय की ग्रोथ इंडस्ट्री है। लोग समय बचाना चाहते हैं और हवाई सफर अब जरूरत बन चुका है। एक यात्रा के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि मध्यम वर्ग के लिए सस्ती और भरोसेमंद एयरलाइन की भारी कमी है- यहीं से शंख एयरलाइन का विचार जन्मा।
एयरलाइंस का नाम शंख क्यों रखा?
श्रवण कुमार बताते हैं कि ‘शंख’ नाम उनके लिए नया नहीं था। उनकी पहले से मौजूद कंपनी में भी यही नाम जुड़ा था। धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान वाला यह नाम उन्हें अपील करता है। हर घर में शंख होता है, लेकिन हर कोई उसे बजा नहीं पाता। श्रवण कहते हैं कि, “हम भी कुछ ऐसा ही करना चाहते हैं, जो सबके पास हो, लेकिन अलग पहचान बनाए।”
टिकट की कीमतें कैसी होंगी?
श्रवण कुमार का सबसे बड़ा दावा है- नो डायनामिक प्राइसिंग। उनका साफ कहना है कि, सुबह 5,000 रुपए की टिकट शाम को 25,000 रुपए नहीं होगी। होली-दिवाली, छठ का त्योहार हो, कुंभ हो या फिर डिमांड ही क्यों न बढ़ जाए… उनकी एयरलाइंस का किराया आसमान नहीं छुएगा। उनका फोकस मध्यम वर्ग पर है। तय रेट, सीमित मुनाफा और भरोसेमंद सेवा, यही शंख एयरलाइन का मॉडल होगा।
इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस पर क्या बोले?
इंडिगो (Indigo), एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइंस को लेकर श्रवण बेहद बेबाक हैं। उनका कहना है, “वो अपनी जगह उड़ रहे हैं, हम अपनी जगह उड़ेंगे। आज कोई 60% मार्केट में है, कल कोई और होगा। मुझे कॉम्पिटीशन से नहीं, अपने काम से मतलब है।”
कौन-कौन से जहाज उड़ेंगे?
शुरुआत में शंख एयरलाइन Airbus A320 विमान से उड़ान भरेगी। पहले Boeing 737 का प्लान था, लेकिन तकनीकी कारणों से Airbus को चुना गया। फिलहाल 3 विमान तैयार हैं, और लक्ष्य है:
2025 तक बेड़ा 10+ विमान
2026–27 तक 15–25 विमान
2026 के बाद इंटरनेशनल उड़ानें
शंख एयरलाइंस का हेड ऑफिस कहां होगा?
शंख एयरलाइन का हेड ऑफिस लखनऊ में होगा। पहली उड़ान भी उत्तर प्रदेश से ही होगी- लखनऊ या जेवर एयरपोर्ट से। श्रवण कहते हैं, “जब यूपी ने मुझे बनाया है, तो पहली उड़ान भी यहीं से होगी।” कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज जैसे शहरों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई से जोड़ने का प्लान है।
कंपनी, वैल्यू और नेटवर्थ कितनी है?
शंख एयरलाइन की शुरुआत 2022 में Shankh Agency Pvt Ltd के रूप में हुई थी, जिसका शेयर कैपिटल करीब 50 करोड़ रुपए बताया जाता है। एविएशन में एंट्री के बाद 26 अक्टूबर 2023 को कंपनी का नाम बदलकर Shankh Aviation Pvt Ltd किया गया। एयरक्राफ्ट, लीज, फाइनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर मिलाकर निवेश सैकड़ों करोड़ रुपए में है। हालांकि श्रवण कुमार अपनी नेटवर्थ को लेकर खुलकर आंकड़ा नहीं बताते, लेकिन ट्रांसपोर्ट, माइनिंग और एविएशन में फैला बिजनेस उन्हें मजबूत कारोबारी बनाता है।

