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October 23, 2026
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ईडी का एक्शन : राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार की गहमागहमी के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बढ़ाई मुश्किलें

चार दिन बाद 25 नवंबर को राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं । ईडी ने नेशनल हेराल्ड केस में यंग इंडिया की 751.9 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है।
यह कार्रवाई ईडी की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। इसके तहत 51.9 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क किया गया है। इस कंपनी में सोनिया-राहुल की 76% हिस्सेदारी है। इसी केस में ED ने 3 अगस्त 2022 को दिल्ली की हेराल्ड बिल्डिंग में स्थित यंग इंडिया कंपनी का ऑफिस सील कर दिया था। पिछले साल 2 और 3 अगस्त को ED की टीम ने नेशनल हेराल्ड के दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत 16 ठिकानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी इस मामले में पहले भी सोनिया और राहुल गांधी से पूछताछ कर चुकी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि जब्त की गई संपत्ति में एजीएल की दिल्ली, मुंबई और लखनऊ सहित कई जगहों की प्रॉपर्टी है। इसकी कुल कीमत 661.69 करोड़ रुपये है। ईडी ने बताया कि यंग इंडिया की प्रॉपर्टी की कीमत 90.21 करोड़ रुपये है।

मालूम हो कि 1937 में द एसोसिएट नाम से कंपनी बनाई गई थी, इसके मूल निवेशकों में जवाहरलाल नेहरू समेत 5,000 स्वतंत्रता सेनानी थे। यह कंपनी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज अखबारों का प्रकाशन करती थी। धीरे-धीरे कंपनी घाटे में चली गई और कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ रुपये का लोन देकर कंपनी को घाटे की उबारने की कोशिश की। हालांकि, वह सफल नहीं हो पाई।इसी बीच 2010 में यंग इंडिया के नाम से एक अन्य कंपनी बनाई गई, जिसमें 76 प्रतिशत शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास और 12-12 प्रतिशत शेयर मोतीलाल बोरा और आस्कर फर्नांडिस के पास था। कांग्रेस पार्टी ने अपना 90 करोड़ का लोन नई कंपनी यंग इंडिया को ट्रांसफर कर दिया। लोन चुकाने में पूरी तरह से असमर्थ द एसोसिएट जर्नल ने अपना सारा शेयर यंग इंडिया को ट्रांसफर कर दिया। इसके बदले में यंग इंडिया ने महज 50 लाख रुपये द एसोसिएट जर्नल को दिए।सुब्रमण्यम स्वामी ने सबसे पहले 2012 में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में निजी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने 2000 करोड़ रुपये की कंपनी को महज 50 लाख रुपये में खरीदे जाने को अवैध करार देते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत मामले से जुड़े कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी।

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