देशभर में आज शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। धनतेरस पर सोना-चांदी, आभूषण और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। हालांकि, इस बार त्रयोदशी तिथि 6 और 7 नवंबर दोनों दिन रहने के कारण लोगों के बीच पर्व की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है।
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और प्रदोष काल के आधार पर मुख्य धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा। वहीं, 7 नवंबर को सुबह तक त्रयोदशी तिथि रहने के कारण इस दिन भी कुछ शुभ खरीदारी के मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
दिल्ली के पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर को धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 02 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5 बजकर 32 मिनट से रात 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस दौरान माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करना शुभ माना जाता है।
6 नवंबर को खरीदारी का शुभ समय
धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने के लिए कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त हैं।
सुबह 10:30 बजे से खरीदारी का शुभ समय शुरू।
दोपहर 12:05 से 1:27 बजे तक शुभ चौघड़िया।
शाम 4:11 से 5:33 बजे तक चर चौघड़िया।
रात 8:49 से 10:27 बजे तक लाभ चौघड़िया।
7 नवंबर को भी खरीदारी का मौका
त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर की सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस दिन सुबह भी खरीदारी की जा सकती है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, सुबह 7 बजकर 59 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगा।
धनतेरस पर क्यों की जाती है खरीदारी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। धनतेरस पर नई वस्तुएं घर लाना सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदते हैं। साथ ही शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

