देहरादून का फर्जी जमीन खेल "बेनकाब" - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
February 12, 2026
Daily Lok Manch
अपराध उत्तराखंड

देहरादून का फर्जी जमीन खेल “बेनकाब”



देहरादून के राजपुर और जौहड़ी क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों से चल रहे करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। उद्योगपति सुधीर विंडलास और उनके सहयोगियों ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे निजी संपत्ति बना डाली। जांच में यह भी सामने आया कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन का असली आकार घटाया गया और उसे फर्जी विक्रय विलेखों के माध्यम से बेच दिया गया। देहरादून के जौहड़ी क्षेत्र में 2 हेक्टेयर सरकारी जमीन को धोखाधड़ी करके निजी व्यक्तियों को बेच दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में कदम उठाते हुए कई संपत्तियों को अटैच किया और आरोपियों से पूछताछ की। कैफे संचालक गोपाल गोयनका और अन्य आरोपियों की भूमिका भी उजागर हुई, जिन्होंने सरकारी जमीनों का उपयोग अवैध लाभ के लिए किया। शुरुआती जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से उद्योगपति और अन्य आरोपी जमीन पर कब्जा कर रहे थे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेच रहे थे। इस घोटाले से न केवल करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति प्रभावित हुई है, बल्कि इससे जनता और निवेशकों के विश्वास पर भी बड़ा झटका लगा है। धामी सरकार ने मामले पर गंभीरता दिखाते हुए प्रशासन और ईडी के साथ पूरी तरह सहयोग किया। राजस्व विभाग में मिलीभगत और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने तत्काल प्रभाव से निरीक्षण और पुनःसमीक्षा के आदेश जारी किए। मामले की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दो हेक्टेयर सरकारी भूमि को कब्जा कर फर्जी विक्रय विलेखों के जरिए आधा-आधा हेक्टेयर अपनी खरीद के नाम दर्ज करवाया और बाकी सरकारी जमीन पर भी कब्जा कर लिया। इससे पहले पुलिस ने चार मुकदमे दर्ज किए थे, जिन्हें अक्टूबर 2022 में सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। अब ईडी इन मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत पूरी जांच कर रही है। धामी सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में जमीन घोटाले और सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए नई निगरानी तंत्र और पारदर्शिता बढ़ाने वाले उपाय किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि जमीन माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जनता के हित की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। यह मामला राज्य में जमीन घोटालों की जटिलता और उनके पीछे की मिलीभगत को उजागर करता है। ईडी की कार्रवाई और धामी सरकार की सहयोगात्मक भूमिका से स्पष्ट संदेश जाता है कि अब कोई भी सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा नहीं कर सकता। जनता की निगाहें अब आरोपियों की गिरफ्तारी और संपत्तियों की रिकवरी पर टिकी हैं।



करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले में बड़े स्तर पर सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत !



देहरादून में सुधीर विंडलास और उनके सहयोगियों के करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले ने प्रशासन और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। यह सिर्फ जमीन कब्जाने का मामला नहीं है, बल्कि यह बड़े स्तर पर सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों के सहारे संपत्ति हड़पने का संगठित जाल है। जांच में पता चला कि आरोपियों ने सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन का असली आकार घटाया और फर्जी विक्रय विलेखों के माध्यम से इसे निजी कब्जे में ले लिया। कई राजस्व अधिकारी इस जाल के हिस्सेदार पाए गए। ईडी की यह कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचारियों को सख्त संदेश देती है, बल्कि यह स्पष्ट करती है कि अब कोई भी सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला राज्य में जमीन घोटालों की गहनता और जटिलता को उजागर करता है। सालों से चल रहे इस घोटाले ने जनता और कारोबारी समुदाय के विश्वास को झकझोरा है। अब ईडी की तेज कार्रवाई से यह जाल धीरे-धीरे खुल रहा है, और आगे संभावित गिरफ्तारियों और और संपत्तियों की अटैचमेंट की उम्मीद है। धामी सरकार ने भी मामले पर कड़ा रुख दिखाया है। राज्य सरकार ने राजस्व विभाग में निगरानी बढ़ाई है और जमीन घोटाले रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। सरकारी अधिकारियों और जमीन माफिया दोनों के लिए यह एक चेतावनी है कि अब कानून अपने पूरे कड़ेपन के साथ लागू होगा। इस खुलासे के बाद देहरादून और आसपास के इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। आम लोगों की निगाहें ईडी की आगे की कार्रवाई, गिरफ्तारियों और जमीनी सुधारों पर टिकी हैं। यह मामला साफ करता है कि कितनी गहरी पैठ बनाकर जमीन माफिया प्रशासनिक तंत्र का फायदा उठा रहे थे, और अब उनके काले कारनामों का पर्दाफाश होने वाला है।



उत्तराखंड में पिछले बड़े जमीन घोटाले हुए, जांच केवल फाइलों में—


देहरादून और हरिद्वार में यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में भूमि से जुड़े कई बड़े घोटाले सामने आए हैं। अभी तक जांच केवल फाइलों में ही है। इसी साल जून 2025 में हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में लगभग 54 करोड़ की लागत से 35 बीघा भूमि खरीदी। आरोप है कि मार्केट रेट पर खरीद के बजाय अधिक कीमत का मुआवजा लिया गया। इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों सहित 12 उच्च अधिकारियों को निलंबित किया गया। ऐसे ही देहरादून और मसूरी में 500 एकड़ सरकारी भूमि का गायब होना । खनन के लिए आवंटित 500 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि गायब हो गई। सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और अवैध कब्जों के कारण इस पर अब लग्जरी रिसॉर्ट और होटल बन रहे हैं। एसआईटी ने देहरादून में 2000 एकड़ से अधिक भूमि के अवैध हस्तांतरण का खुलासा किया। कई सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आई।इन मामलों से साफ है कि राज्य में भूमि घोटाले और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत एक गंभीर समस्या बन चुके हैं। धामी सरकार ने साफ किया है कि भ्रष्ट अधिकारियों और जमीन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता और कारोबारी समुदाय के विश्वास को बहाल करने के लिए राज्य सरकार ने राजस्व विभाग की निगरानी बढ़ाई और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले उपाय लागू किए हैं। देहरादून का यह नया घोटाला और पिछले मामले राज्य में भूमि घोटाले की जटिलता को उजागर करते हैं। ईडी की कार्रवाई, सरकारी निगरानी और धामी सरकार के निर्देशों से अब उम्मीद है कि राज्य में भूमि घोटाले पर नियंत्रण और जवाबदेही कायम होगी।

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