देहरादून से पहाड़ों की रानी मसूरी का सफर वर्षों से उत्तराखंड की सुंदरता और उसकी मजबूरियों, दोनों का प्रतीक रहा है। एक ओर हर मोड़ पर खुलते पहाड़, बादलों से ढकी घाटियां और देवदार के जंगल हैं, तो दूसरी ओर वही घुमावदार सड़कें, खतरनाक ढलान, हर सीजन में लगने वाला जाम और जरा-सी बारिश में बढ़ता डर। पर्यटन सीजन हो या छुट्टियों का समय, मसूरी जाने वाला रास्ता अक्सर घंटों की परीक्षा बन जाता है। अब इसी मजबूरी से राहत की उम्मीद जगी है। मसूरी में लगने वाले जाम से जल्द निजात मिल सकती है, क्योंकि देहरादून-मसूरी के बीच 42 किलोमीटर लंबा नया राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है। करीब 3500 करोड़ रुपये की लागत वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की एलाइनमेंट को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी सिर्फ एक सड़क की स्वीकृति नहीं है, बल्कि पहाड़ों में यात्रा और यातायात की सोच बदलने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इस परियोजना के लिए वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान को सर्वे का जिम्मा सौंपा गया है, ताकि पहाड़ों की संवेदनशील भूगर्भीय संरचना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित और टिकाऊ निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।
इस नए हाईवे में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना के तहत जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र के नीचे लगभग 2.9 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जबकि मसूरी की पहाड़ियों में करीब 2 किलोमीटर लंबी दूसरी सुरंग प्रस्तावित है। ये सुरंगें उस खतरनाक और समय लेने वाले चढ़ाई-उतराई वाले रास्ते का विकल्प बनेंगी, जो आज देहरादून से मसूरी के बीच सबसे बड़ी चुनौती है। नया हाईवे देहरादून के झाझरा क्षेत्र से शुरू होकर सीधे मसूरी के लाइब्रेरी चौक तक पहुंचेगा। इसके पूरा होने के बाद न सिर्फ दूरी कम होगी, बल्कि यात्रा का समय भी काफी घट जाएगा और जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकार देहरादून और आसपास के पहाड़ी शहरों में यातायात दबाव को कम करने के लिए एक साथ कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसी कड़ी में देहरादून में प्रस्तावित पॉड टैक्सी परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट को संशोधित करने के निर्देश दिए गए हैं। सचिव, आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में मसूरी और नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की कवायद तेज करने पर भी जोर दिया गया। बैठक में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक द्वारा देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी और नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी स्टडी की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान परियोजनाओं के तकनीकी, सामाजिक, पर्यावरणीय और वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की गई। बताया गया कि देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना को ईबीआरटीएस के फीडर सिस्टम के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव कम किया जा सके। पीआरटी परियोजना के तहत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। क्लेमेंटाउन से बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन और गांधी पार्क से आईटी पार्क तक। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती देगी। बैठक में निगम द्वारा तैयार की गई डीपीआर पर गहन चर्चा हुई और आवास सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, सामाजिक प्रभाव और वित्तीय व्यवहार्यता को और अधिक ठोस रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने आगामी समीक्षा बैठक में संशोधित डीपीआर के साथ दोबारा प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश भी दिए। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी कॉरिडोर के संरेखण का स्थलीय निरीक्षण करने की इच्छा भी जताई, ताकि जमीनी स्तर पर परियोजना की व्यवहारिकता का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। इसके साथ ही मसूरी और नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी स्टडी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक ने अवगत कराया कि रोपवे परियोजनाएं पर्वतीय शहरों में यातायात जाम, पार्किंग की समस्या और प्रदूषण को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में आवास सचिव ने रोपवे परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली समस्त भूमि का विस्तृत विवरण, स्वामित्व की स्थिति सहित तैयार करने और संबंधित विभागों से पत्राचार कर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि संबंधी पहलुओं का समयबद्ध समाधान इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए बेहद जरूरी है। डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना और मसूरी व नैनीताल में रोपवे परियोजनाएं राज्य के लिए महत्वपूर्ण पहल हैं, जिनसे यातायात दबाव कम होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सभी परियोजनाओं को पारदर्शी, व्यावहारिक और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
मसूरी और आसपास के इलाकों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी–
देहरादून-मसूरी नया राष्ट्रीय राजमार्ग एक ऐसी कड़ी के रूप में उभर रहा है, जो पहाड़ों की यात्रा का चेहरा बदल सकती है। यह सड़क सिर्फ वाहनों की आवाजाही का माध्यम नहीं होगी, बल्कि यह उस मानसिक दूरी को भी कम करेगी, जो आज लोग मसूरी जाने से पहले महसूस करते हैं। जाम का डर, हादसों की आशंका और समय की अनिश्चितता। नए मार्ग के बाद मसूरी जाना महज एक खूबसूरत सफर रह जाएगा, न कि एक चुनौती। स्थानीय लोगों और व्यापारियों को उम्मीद है कि इस परियोजना से न सिर्फ पर्यटकों को राहत मिलेगी, बल्कि मसूरी और आसपास के इलाकों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। होटल व्यवसाय, स्थानीय दुकानदार और टैक्सी चालक सभी को बेहतर कनेक्टिविटी से सीधा लाभ मिलेगा। आपातकालीन सेवाओं के लिए भी यह मार्ग जीवनरेखा साबित हो सकता है, क्योंकि कम समय में सुरक्षित पहुंच संभव हो सकेगी। हालांकि, पहाड़ों में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के साथ पर्यावरण को लेकर चिंताएं भी जुड़ी रहती हैं। ऐसे में वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, ताकि निर्माण के दौरान भूस्खलन, जलस्रोतों और पारिस्थितिकी पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। यदि संतुलन और संवेदनशीलता के साथ यह परियोजना पूरी होती है, तो यह उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण के बीच सामंजस्य का एक उदाहरण बन सकती है। देहरादून-मसूरी नया मार्ग, पॉड टैक्सी और रोपवे जैसी योजनाएं मिलकर एक ऐसी तस्वीर पेश कर रही हैं, जिसमें पहाड़ों की सुंदरता सुरक्षित रहे और यात्रा आसान, सुरक्षित और भरोसेमंद बन सके। यह सिर्फ सड़कों और सुरंगों की कहानी नहीं है, बल्कि उस उम्मीद की कहानी है, जिसमें उत्तराखंड का भविष्य जाम और डर से नहीं, बल्कि सुगम रास्तों और संतुलित विकास से तय होगा।
देहरादून से मसूरी अब डर नहीं सुकून का होगा सफर–
गढ़वाल की गोद में बसी पहाड़ों की रानी मसूरी हमेशा से सैलानियों की पहली पसंद रही है। दिल्ली, यूपी, हरियाणा, पंजाब ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से लोग मसूरी की ठंडी हवा, बादलों की ओट और माल रोड की रौनक का लुत्फ उठाने आते हैं। लेकिन इस खूबसूरत मंज़िल तक पहुंचने का रास्ता अक्सर उतना ही कठिन और डरावना साबित होता है। देहरादून से मसूरी के बीच घुमावदार सड़क, तीखे मोड़, भारी ट्रैफिक और सीजन में लगने वाला लंबा जाम सैलानियों की खुशी को कई बार सफर में ही थका देता है। अब हालात बदलने की उम्मीद जगी है। देहरादून–मसूरी के बीच प्रस्तावित नया मार्ग मसूरी आने वाले सैलानियों के लिए राहत की बड़ी सौगात बन सकता है। यह मार्ग बन जाने के बाद न सिर्फ दूरी कम होगी, बल्कि यात्रा ज्यादा सुरक्षित, सुगम और सुखद हो जाएगी। अब तक जहां मसूरी पहुंचने में घंटों लग जाते थे, वहीं नए मार्ग से कम समय में पहाड़ों की रानी तक पहुंचना संभव हो सकेगा। खासतौर पर वे परिवार, बुजुर्ग और महिला पर्यटक, जो अब तक खतरनाक मोड़ों और जाम के डर से मसूरी जाने से कतराते थे, उनके लिए यह बदलाव बेहद अहम होगा। पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि यह नया मार्ग मसूरी के पर्यटन को नई ऊंचाई देगा। देहरादून एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से मसूरी की कनेक्टिविटी आसान होने से बाहर से आने वाले सैलानी सीधे और सुरक्षित तरीके से पहाड़ों तक पहुंच सकेंगे। इससे न सिर्फ सैलानियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि उनका अनुभव भी पहले से कहीं ज्यादा सकारात्मक होगा। जाम में फंसे बिना, बिना घबराहट के पहाड़ों के बीच सफर करना मसूरी यात्रा को यादगार बना देगा। स्थानीय होटल व्यवसायियों और टैक्सी चालकों को भी इस मार्ग से बड़ी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि जब सफर आसान और भरोसेमंद होगा, तो लोग मसूरी में ज्यादा समय बिताना पसंद करेंगे। इससे होटल बुकिंग, स्थानीय बाजार और रोजगार के अवसरों में भी इजाफा होगा। मसूरी सिर्फ वीकेंड डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि एक आरामदायक हिल स्टेशन के रूप में और मजबूत पहचान बना सकेगी। यह मार्ग सिर्फ सैलानियों की सुविधा नहीं बढ़ाएगा, बल्कि आपात सेवाओं के लिए भी वरदान साबित होगा। दुर्घटना, बीमारी या किसी आपदा की स्थिति में देहरादून से मसूरी तक तेज़ और सुरक्षित पहुंच संभव हो सकेगी। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनेगा। देहरादून-मसूरी के बीच बनने वाला नया मार्ग पहाड़ों की रानी तक पहुंचने के अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है। जहां आज सफर में डर और देरी जुड़ी है, वहीं आने वाले समय में यही यात्रा सुकून, सुरक्षा और आनंद का पर्याय बन सकती है। मसूरी का क्रेज तो पहले से ही चरम पर है, अब रास्ता भी उसी खूबसूरती और भरोसे के काबिल बनने जा रहा है।

