किसान आत्महत्या मामले में पुलिस की लापरवाही पर सीएम धामी का सख्त एक्शन - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
January 19, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

किसान आत्महत्या मामले में पुलिस की लापरवाही पर सीएम धामी का सख्त एक्शन


   
हल्द्वानी के गौलापार स्थित होटल में 11 जनवरी को 40 वर्षीय किसान सुखवंत सिंह ने अपनी जान दे दी। अपने जीवन के अंतिम क्षणों में उन्होंने फेसबुक लाइव के माध्यम से आरोप लगाए कि उनके साथ 26 लोगों ने चार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है। उन्होंने बताया कि वह कई बार पुलिस प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से इंसाफ मांगते रहे, लेकिन किसी ने उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। इस फेसबुक लाइव में उन्होंने सीधे एसएसपी समेत कई पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। कुछ ही मिनटों के भीतर उन्होंने अपने कनपट्टी पर गोली मार ली, और इस घटना ने न केवल उनके परिवार और गांव को सदमे में डाल दिया, बल्कि पूरे प्रदेश को भी हिला कर रख दिया। स्थानीय लोग और किसान संगठनों ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया। उनका कहना था कि यह केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि किसानों के साथ हो रही लगातार लापरवाही और न्यायिक अक्षमता की शर्मनाक तस्वीर पेश करता है। कई लोग सड़क पर उतर आए और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना पर गहरी संवेदना और आक्रोश व्यक्त कर रहे थे। घटना के तुरंत बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। पैगा चौकी के कोतवाल और संबंधित एसआई को सस्पेंड कर दिया गया और पूरी चौकी को लाइन हाजिर कर दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए। एसआईटी का नेतृत्व आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे करेंगे, और इसमें एसपी चम्पावत अजय गणपति, सीओ टनकपुर वंदना वर्मा, निरीक्षक दिवान सिंह बिष्ट, एसआई मनीष खत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। एसआईटी को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करे। पुलिस की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस मुख्यालय ने 12 पुलिसकर्मियों को ऊधमसिंह नगर से हटाकर गढ़वाल रेंज के चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में ट्रांसफर कर दिया। इनमें आईटीआई थानाध्यक्ष रहे दरोगा कुंदन सिंह रौतेला, दरोगा प्रकाश बिष्ट, हेड कांस्टेबल शेखर बनकोटी, सिपाही भूपेंद्र सिंह, दिनेश तिवारी, सुरेश चंद्र, दरोगा जितेंद्र कुमार, एएसआई सोमवीर सिंह, सिपाही योगेश चौधरी, राजेंद्र गिरी, दीपक प्रसाद और संजय कुमार शामिल हैं। यह कदम जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और प्रभावित न होने देने के लिए उठाया गया है। डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि सुखवंत ने आत्महत्या से पहले प्रदेश के आला अधिकारियों और विभिन्न विभागों को ई-मेल भेजा था। इसमें उन्होंने स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लिखे थे। ई-मेल में 17 अटैचमेंट थे और इसे 30 ई-मेल आईडी पर सीसी किया गया था।एसआईटी ने इस ई-मेल की भी गहन पड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना था कि इस जांच में हर पहलू की जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना पुलिस की लगातार लापरवाही और किसानों के साथ हो रही न्यायिक अक्षमता का प्रतीक है। कई किसानों ने बताया कि सुखवंत कई बार प्रशासन के पास इंसाफ की गुहार लेकर गए थे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एसआईटी की जांच से पहले ही लोगों में सरकार से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। प्रदेश सरकार का यह कदम पुलिस में अनुशासन बनाए रखने और किसानों के मामलों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और एसआईटी की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ होगी। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर इस घटना की व्यापक चर्चा हो रही है। किसान संगठनों और नागरिकों का कहना है कि सुखवंत की आत्महत्या ने पुलिस की लापरवाही और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसआईटी जांच की निगरानी के लिए उच्च स्तर पर निर्देश दिए गए हैं कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा न जाए और कार्रवाई समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। इस मामले में एसआईटी जांच की शुरूआत के साथ ही पूरे प्रदेश में अधिकारियों और पुलिसकर्मियों में अलर्ट मोड सक्रिय हो गया है। अधिकारी इस मामले में हर छोटे से छोटे तथ्य की जांच कर रहे हैं, जिसमें किसान द्वारा भेजे गए ई-मेल, स्थानीय शिकायतें, पुलिस रिपोर्ट और फेसबुक लाइव वीडियो शामिल हैं। एसआईटी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कोई भी संबंधित पुलिसकर्मी जांच में हस्तक्षेप न कर सके। यह प्रकरण किसानों के अधिकार, प्रशासन की जवाबदेही और पुलिस की निष्पक्षता के महत्व को उजागर करता है। प्रदेश में यह उम्मीद जताई जा रही है कि एसआईटी की जांच से दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में किसानों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता आएगी।   
   
   
   
   
किसान आत्महत्या मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई : सीएम धामी–    
   
   
   
ऊधमसिंह नगर जनपद के काशीपुर निवासी किसान द्वारा हल्द्वानी में आत्महत्या किए जाने के गंभीर प्रकरण को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत द्वारा मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए । मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि इस दुखद घटना के सभी तथ्यों और परिस्थितियों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दोष पाया जाता है तो संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा सके। मुख्यमंत्री धामी ने इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्धन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ से भी पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली है। मुख्यमंत्री धामी ने दिवंगत किसान के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।   
   
   
   
यशपाल आर्य ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर साधा निशाना–   
   
   
   
किसान की आत्महत्या के मामले में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उत्तराखंड पुलिस आज अपनी मूल जिम्मेदारी, कानून की रखवाली छोड़कर जमीन और सत्तासंरक्षित लेन-देन के कारोबार में उलझ गई है। इसका भयावह उदाहरण काशीपुर से सामने आया, जहां किसान सुखवंत सिंह ने न्याय न मिलने की पीड़ा में वीडियो जारी कर अपने जीवन का अंत कर लिया। आर्य ने इस घटना को केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बताया बल्कि इसे व्यवस्था के नैतिक पतन और सरकार की नाकामी का जीवंत प्रमाण कहा। उनका कहना था कि यह वारदात प्रदेश में व्याप्त भ्रष्ट और असंतुलित कानून-व्यवस्था का सबूत है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि सुखवंत सिंह ने अपने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि उनके साथ चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। जब उन्होंने न्याय की आस लेकर थाने का रुख किया, तो आरोप है कि थाना प्रभारी और एसपी स्तर तक के पुलिस अधिकारियों ने शिकायत सुनने के बजाय पैसों के लालच में दूसरे पक्ष का साथ दिया। पीड़ित को डराया-धमकाया गया, बार-बार थाने बुलाकर प्रताड़ित किया गया और आखिरकार पूरी तरह हताश कर दिया गया। यशपाल आर्य ने कहा कि यह घटना किसी एक थाने या जिले की नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासन की कार्यशैली और उत्तराखंड पुलिस के गिरते भरोसे पर तमाचा है। उन्होंने चेताया कि प्रदेश भय, अन्याय और असुरक्षा की ओर बढ़ रहा है और वही चेतावनी अब एक मौत के रूप में सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता में बैठे लोग चाहे स्थायी हों या अस्थायी, लेकिन अन्याय का हिसाब इतिहास जरूर लेता है। आर्य ने कहा कि सुखवंत सिंह की आत्महत्या पूरी घटना उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन के माथे पर कलंक है और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होना आवश्यक है।   
   
   
   
किसान आत्महत्या मामले में कांग्रेस नेताओं ने किया धरना प्रदर्शन–   
   
   
उत्तराखंड में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले ने पूरे प्रदेश में संवेदनशील स्थिति पैदा कर दी । इस गंभीर प्रकरण को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने मंगलवार को काशीपुर में जोरदार धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने पुलिस की लापरवाही और सरकार की निष्क्रियता पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था की विफलता और किसानों के साथ हो रहे अन्याय का प्रतीक है।   
धरने के दौरान नेताओं ने कहा कि सुखवंत सिंह ने अपने फेसबुक लाइव वीडियो और ई-मेल के जरिए पुलिस और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन बावजूद इसके प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की। यशपाल आर्य ने चेताया कि राज्य में लगातार बढ़ते अन्याय और भय के माहौल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। धरने में स्थानीय लोग और किसान संगठन भी शामिल हुए। उन्होंने सरकार से न्याय दिलाने और भविष्य में किसानों के मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, लेकिन इसमें सरकार और पुलिस प्रशासन के प्रति नाराजगी साफ झलक रही थी।   
   
   
   
नियमों को ताक पर रखकर इंस्पेक्टर की कुर्सी पर बैठाया गया दरोगा, पुलिस व्यवस्था की खुली पोल–   
   
   
   
काशीपुर क्षेत्र के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद उधमसिंह नगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला अब केवल एक किसान की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग में लंबे समय से चल रहे अटैचमेंट और पदस्थापना के खेल को उजागर करता दिखाई दे रहा है। आत्महत्या प्रकरण सामने आने के बाद काशीपुर चौकी और आईटीआई कोतवाली की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शुरुआती दौर में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी बीच यह तथ्य सामने आया कि आईटीआई कोतवाली में इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारी कुंदन रौतेला मूल रूप से दरोगा हैं, जिनका वेतन बागेश्वर जनपद से आहरित होता है, जबकि उनकी तैनाती उधमसिंह नगर में की गई है। दरोगा कुंदन रौतेला के खिलाफ पूर्व में शिकायतें और एफआईआर दर्ज रही हैं। इन शिकायतों के बावजूद उन्हें बागेश्वर से अटैच कर उधमसिंह नगर लाया गया और नियमों को दरकिनार करते हुए आईटीआई कोतवाली में इंस्पेक्टर की कुर्सी सौंप दी गई। यह पूरा मामला पुलिस विभाग की आंतरिक व्यवस्था, नियमों की अनदेखी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। किसान सुखवंत सिंह की मौत के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई होती और नियमों के अनुसार अधिकारियों की तैनाती की जाती, तो यह दुखद घटना शायद टाली जा सकती थी। मामले को लेकर आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने कहा कि किसान आत्महत्या प्रकरण को गंभीरता से लिया गया है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अटैचमेंट और तैनाती की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है। वहीं एसएसपी उधमसिंह नगर मणिकांत मिश्रा ने कहा कि आत्महत्या मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। सभी तथ्यों और पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिकता है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है। नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों की तैनाती की जा रही है और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। 
 
 

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