हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार (21 मार्च) को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका चौथा बजट है। लगभग 4 घंटे 16 मिनट तक चले बजट भाषण में उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से राज्य की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। इस कारण बजट का आकार भी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3,586 करोड़ रुपये कम रखा गया है।
सीएम सुक्खू ने कहा कि RDG बंद होने से राज्य को हर साल औसतन 8,105 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके बावजूद सरकार विकास कार्यों की गति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने वित्तीय हालात को देखते हुए अगले छह महीने तक मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत, डिप्टी सीएम और मंत्रियों का 30 प्रतिशत तथा विधायकों का 20 प्रतिशत वेतन डेफर करने की घोषणा की।
इसके साथ ही मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव, डीजीपी, एडीजी, एसपी रैंक के अधिकारियों सहित न्यायिक अधिकारियों और क्लास-वन श्रेणी के अफसरों की सैलरी भी डेफर की जाएगी। क्लास-वन और क्लास-टू श्रेणी के कर्मचारियों की 3 प्रतिशत सैलरी डेफर होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आर्थिक स्थिति सुधरने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी।
वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए विधायक क्षेत्र विकास निधि भी घटाने का फैसला लिया गया है। इसे 2 करोड़ 10 लाख रुपये से घटाकर 1 करोड़ 10 लाख रुपये कर दिया गया है।
वहीं, सरकार ने लगभग 70 हजार अस्थायी कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके मानदेय में 300 से 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की। अनुबंध कर्मचारियों को साल में एक बार की जगह अब दो बार नियमित करने का निर्णय लिया गया है। न्यूनतम दिहाड़ी में 50 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 750 रुपये प्रतिदिन करने का भी ऐलान किया गया।
पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने तीन ऑल वेदर आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की घोषणा की। सोलन जिले के बद्दी के सुल्तानपुर क्षेत्र में “हिम चंडीगढ़”, सिरमौर जिले में मोरनी हिल के पास “हिम पंचकूला” और धौलाधार क्षेत्र में तीसरी टाउनशिप विकसित की जाएगी। प्रत्येक टाउनशिप लगभग 10 हजार बीघा भूमि पर बनाई जाएगी।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बड़े शहरों पर दबाव कम होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे हिमाचल प्रदेश में संतुलित क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
अफसरों की सैलरी में कटौती, कर्मचारियों को राहत
सरकार ने अगले छह महीने के लिए सभी वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी में 20 से 30 प्रतिशत तक कटौती (डेफर) करने का ऐलान किया है। हालांकि थर्ड और फोर्थ क्लास कर्मचारियों को पूरी सैलरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिति बेहतर होने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी।
इसके साथ ही कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने वाले वित्तीय लाभ चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाएंगे। स्टडी लीव पर जाने वाले कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का भी निर्णय लिया गया है। दिहाड़ी मजदूरी 50 रुपये बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिदिन की गई है, जबकि आउटसोर्स कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 13,500 रुपये तय किया गया है। आशा वर्कर, मल्टी टास्क वर्कर, मिड डे मील कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है।
विधायक निधि में कटौती, अन्य प्रावधान
सरकार ने विधायकों की विधायक क्षेत्र विकास निधि घटाकर 1 करोड़ 10 लाख रुपये कर दी है। वहीं विधायक प्राथमिकता योजनाओं का बजट बढ़ाकर 225 करोड़ रुपये किया गया है। विधायकों की डिस्क्रिशनरी ग्रांट में 1 लाख रुपये की बढ़ोतरी का भी ऐलान किया गया है।
युवाओं और सुरक्षा से जुड़े फैसले
परमवीर चक्र विजेता कैप्टन संजय कुमार युवाओं को सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए तैयार करेंगे और उन्हें सरकार की ओर से मासिक सम्मान राशि दी जाएगी। साथ ही प्रदेश में पैरामिलिट्री बोर्ड के गठन का भी ऐलान किया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े प्रावधान किए। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 2,468 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में करीब 46 करोड़ रुपये की लागत से PET स्कैन मशीन लगाई जाएगी। टांडा और आईजीएमसी शिमला में आधुनिक जांच सुविधाएं शुरू होंगी, जबकि एम्स बिलासपुर में 20 करोड़ रुपये की डिजिटल एंजियोग्राफी मशीन स्थापित की जाएगी।
नाहन में मेडिकल कॉलेज के निर्माण पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। चंबा मेडिकल कॉलेज में स्किल लैब बनाई जाएगी और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में ICU यूनिट स्थापित होंगी। आईजीएमसी शिमला और टांडा में IVF, एम्ब्रियो ट्रांसफर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं शुरू करने की योजना है।
सरकार टेली-ऑन्कोलॉजी सेवा शुरू करेगी, जिससे बड़े अस्पतालों को जोड़ा जाएगा। हेपेटाइटिस और HIV की जांच के लिए NAT टेस्टिंग शुरू होगी। 14-15 वर्ष की करीब 65 हजार किशोरियों के लिए HPV टीकाकरण कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं की निगरानी के लिए डिजिटल एप लाया जाएगा।
धार्मिक पर्यटन और ऊर्जा पर फोकस
प्रदेश के सभी बड़े मंदिरों को धार्मिक पर्यटन से जोड़ा जाएगा। मंदिरों और शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने के लिए 65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सभी सरकारी भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे।
पेयजल और बुनियादी ढांचे के लिए बड़े ऐलान
बजट में 500 नए जल शोधन संयंत्र बनाने की घोषणा की गई है। 34 जल परियोजनाओं में पंपिंग के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण के लिए 1,617 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए नीति आयोग के सहयोग से स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। इन सभी घोषणाओं से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, रोजगार के अवसर और बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

