Budget 2026: मिडिल क्लास को क्या मिला? आसान भाषा में समझिए बजट का असर - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
February 3, 2026
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Budget 2026: मिडिल क्लास को क्या मिला? आसान भाषा में समझिए बजट का असर



केंद्रीय बजट 2026 से मिडिल क्लास सैलरीधारकों को बड़ी टैक्स राहत की उम्मीद थी, लेकिन इस बार भी टैक्स स्लैब में कोई सीधा बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नौवें बजट भाषण में कई ऐसे छोटे लेकिन अहम फैसले शामिल हैं, जो मिडिल क्लास और छोटे निवेशकों के लिए लंबी अवधि में फायदे के नए रास्ते खोलते हैं। इन फैसलों का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना, खर्च कम करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

आइए जानते हैं, बजट 2026 में मिडिल क्लास के लिए क्या-क्या खास है




इनकम टैक्स: राहत नहीं, लेकिन स्थिरता बनी रही

सरकार ने सैलरीधारकों के लिए इस साल कोई नई टैक्स छूट नहीं दी है। पुरानी नीति को ही जारी रखा गया है। बजट के मुताबिक, 12 लाख रुपये तक की सालाना आय टैक्स फ्री रहेगी। इसके साथ 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने पर टैक्स-फ्री इनकम की सीमा 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। टैक्स स्लैब में इस साल भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।


टैक्स रेशनलाइजेशन: विदेश पैसा भेजना हुआ सस्ता

बजट का एक बड़ा फोकस टैक्स प्रक्रिया को आसान बनाना और विदेश पैसा भेजने पर बोझ कम करना है।

विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाला TCS अब 5% और 20% की जगह केवल 2% कर दिया गया है।

पढ़ाई और इलाज के लिए LRS के तहत विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर भी TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।


इससे मिडिल क्लास परिवारों की बचत पर सकारात्मक असर पड़ेगा।




ITR और निवेशकों से जुड़े अहम बदलाव

बजट में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स ITR-1 और ITR-2 अब 31 जुलाई तक दाखिल कर सकेंगे।

नॉन-ऑडिट व्यवसाय और ट्रस्ट्स के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त तय की गई है।


छोटे निवेशकों को राहत देने के लिए सभी बायबैक (Buyback) पर टैक्स लगाने का तरीका बदला गया है। अब इन्हें डिविडेंड नहीं, बल्कि कैपिटल गेन के रूप में टैक्स किया जाएगा।

इसके अलावा, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा दिए जाने वाले ब्याज को आयकर से मुक्त कर दिया गया है और इस पर TDS भी नहीं कटेगा।

डिविडेंड और ब्याज आय पर TDS से जुड़े फॉर्म 15G और 15H के लिए सिंगल-विंडो फाइलिंग सिस्टम लाने का प्रस्ताव भी किया गया है, जिससे प्रक्रिया आसान होगी।



सस्ती दवाएं और रोजमर्रा के प्रोडक्ट

बजट में स्वास्थ्य और कंज्यूमर सेक्टर को भी राहत दी गई है।

करीब 17 कैंसर की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाने से ये दवाएं सस्ती होंगी।

सात दुर्लभ बीमारियों की दवाओं का निजी आयात भी अब टैक्स फ्री होगा।


इसके अलावा, माइक्रोवेव ओवन, टीवी उपकरण, चमड़े के सामान और जूते-चप्पलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महंगे पुर्जों पर शुल्क छूट दी गई है, जिससे इनके दाम घट सकते हैं।



रोजगार के नए अवसर

सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया है। पर्यटन, रेलवे और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अतिरिक्त निवेश से रोजगार के नए मौके बनेंगे। साथ ही, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे आने वाले समय में नौकरी और स्किल डेवलपमेंट के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, बजट 2026 ने मिडिल क्लास को तुरंत टैक्स राहत तो नहीं दी, लेकिन खर्च कम करने, बचत बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने के जरिए लंबी अवधि में फायदे देने की कोशिश जरूर की है।

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