राजधानी देहरादून में लगातार हो रही हत्याओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। महज 16 दिनों के भीतर पांचवीं हत्या की वारदात ने न केवल आम जनता को दहशत में डाला, बल्कि पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगीं। बढ़ते जनदबाव और विपक्ष के हमलों के बीच आखिरकार सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए देहरादून के एसएसपी रहे अजय सिंह को पद से हटा दिया है। उन्हें अब एसएसपी एसटीएफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार ने राजधानी की कमान अब हरिद्वार के एसएसपी रहे प्रमेन्द्र डोबाल को सौंप दी है। डोबाल को सख्त और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता है। ऐसे में देहरादून में उनकी तैनाती को सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था सुधारने की कवायद माना जा रहा है।
16 दिन, 5 हत्याएं और बढ़ता जनाक्रोश
देहरादून में बीते दो सप्ताह के भीतर हत्या की एक के बाद एक घटनाओं ने पुलिस की सतर्कता पर सवाल खड़े किए। शहर के व्यस्त बाजारों से लेकर रिहायशी इलाकों तक अपराधियों के हौसले बुलंद दिखाई दिए। ताजा घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आक्रोश दिखाई दे रहा था। विपक्षी दल भी सरकार पर हमलावर थे और पुलिस नेतृत्व में बदलाव की मांग तेज हो गई थी।
ऐसे माहौल में देर शाम जारी तबादला सूची ने साफ संकेत दे दिया कि सरकार अब सख्त संदेश देना चाहती है। एसएसपी अजय सिंह को हटाकर उन्हें एसटीएफ की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे अपराध के बड़े और संगठित मामलों से निपटने वाली अहम इकाई माना जाता है।
हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भी बड़ा बदलाव
देहरादून के साथ-साथ हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। एसटीएफ में तैनात नवनीत सिंह भुल्लर को हरिद्वार का नया एसएसपी बनाया गया है। हरिद्वार जैसे संवेदनशील जिले में उनकी तैनाती को रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
वहीं ऊधम सिंह नगर में चर्चित सुखवंत सुसाइड केस के बाद लगातार विवादों में रहे एसएसपी मणिकांत मिश्रा का भी तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह अब अजय गणपति कुमार को जिले की कमान सौंपी गई है। ऊधम सिंह नगर औद्योगिक और सीमावर्ती जिला होने के कारण हमेशा से संवेदनशील माना जाता रहा है।

क्या बदलेगी राजधानी की तस्वीर?
प्रमेन्द्र डोबाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में अपराध पर त्वरित नियंत्रण स्थापित करना होगी। लगातार हो रही हत्याओं ने पुलिस की गश्त, खुफिया तंत्र और अपराधियों पर निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब नए एसएसपी से उम्मीद की जा रही है कि वे थानों की जवाबदेही तय करेंगे, बीट सिस्टम को मजबूत करेंगे और संगठित अपराधियों पर शिकंजा कसेंगे।
राजनीतिक गलियारों में भी इस फेरबदल को आगामी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। साफ है कि सरकार फिलहाल किसी भी तरह की लापरवाही का संदेश नहीं देना चाहती। लगातार हो रही वारदातों ने प्रशासन को झकझोर दिया है और अब यह तबादला एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, अपराध पर नियंत्रण नहीं तो कुर्सी सुरक्षित नहीं।
फिलहाल निगाहें नई तैनाती पर टिकी हैं। क्या देहरादून की सड़कों पर फिर से भरोसे का माहौल लौटेगा, या यह बदलाव भी महज एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाएगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।

