मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सीएम धामी ने 14 दायित्वधारियों को बोर्ड-निगमों में दी जिम्मेदारी - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
April 4, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सीएम धामी ने 14 दायित्वधारियों को बोर्ड-निगमों में दी जिम्मेदारी

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन साधने की दिशा में दायित्वों का बंटवारा शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने बोर्ड, निगम और परिषदों के खाली पदों पर 14 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपते हुए विभिन्न समितियों और आयोगों में उपाध्यक्ष व अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। सरकार की ओर से जारी आदेशों में क्षेत्रीय संतुलन, संगठन में सक्रिय रहे नेताओं को जिम्मेदारी और विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति साफ दिखाई दे रही है। इन नियुक्तियों को आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक मजबूती से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जारी आदेशों के अनुसार नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव रौतेला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं टिहरी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सोना सजवाण को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए जड़ी-बूटी सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। काशीपुर की पूर्व प्रदेश मंत्री सीमा चौहान को मत्स्य विकास अभिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसी क्रम में अल्मोड़ा के गोविंद सिंह को हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि चम्पावत के मुकेश महराना को चाय विकास सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कुलदीप बुटोला को उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता खेम सिंह चौहान को अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके अलावा चारु कोठारी को राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा नेता बलजीत सोनी को अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। चम्पावत की हरिप्रिया जोशी को राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। प्रेम सिंह राणा को जनजाति आयोग में उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अशोक वर्मा को राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। धामी सरकार की ओर से किए गए इस दायित्व बंटवारे में अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। पहाड़ और मैदानी क्षेत्रों के नेताओं को शामिल करते हुए संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि लंबे समय से दायित्वों की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं को समायोजित कर सरकार ने संगठन में संतुलन साधने का प्रयास किया है।



धामी सरकार का संगठनात्मक संतुलन के साथ राजनीतिक संदेश



मंत्रिमंडल विस्तार के बाद किए गए इस दायित्व बंटवारे को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। सरकार ने विभिन्न आयोगों और परिषदों में नियुक्तियां कर संगठन के वरिष्ठ और सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी दी है, जिससे कार्यकर्ताओं में संदेश गया है कि सरकार संगठन के साथ समन्वय बनाकर चल रही है। लंबे समय से बोर्ड और निगमों के पद खाली चल रहे थे, जिन्हें लेकर पार्टी के भीतर भी चर्चाएं चल रही थीं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब इन पदों पर नियुक्तियां कर सरकार ने असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश की है। खास बात यह है कि नियुक्तियों में क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान रखा गया है। महिलाओं, पिछड़ा वर्ग, जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े नेताओं को भी जिम्मेदारी देकर व्यापक प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। धामी सरकार ने इन नियुक्तियों के जरिए संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। विभिन्न आयोगों और परिषदों में नियुक्त किए गए पदाधिकारी सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में भूमिका निभाएंगे। साथ ही आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों में भी इनकी सक्रिय भागीदारी रहेगी। माना जा रहा है कि यह दायित्व बंटवारा आगे भी जारी रह सकता है और शेष खाली पदों पर भी जल्द नियुक्तियां की जाएंगी। फिलहाल 14 नेताओं को जिम्मेदारी देकर धामी सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब संगठनात्मक समायोजन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सरकार की इस पहल को राजनीतिक संतुलन साधने और संगठन को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

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