हिमाचल प्रदेश सरकार ने शहरी निकायों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश के 45 नगर निकायों में प्रशासकों (एडमिनिस्ट्रेटर) की नियुक्ति कर दी गई है। इस संबंध में सरकार की ओर से औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
प्रिंसिपल सेक्रेटरी शहरी विकास विभाग देवेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि अब नगर निकायों से जुड़े विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसले कार्यकारी अधिकारी (EO) और सचिव के स्तर पर लिए जाएंगे। नगर परिषदों में EO जबकि नगर पंचायतों में सचिव प्रशासक की भूमिका निभाएंगे।
जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त, चुनाव टले
प्रदेश के करीब 45 नगर निकायों में मौजूदा जनप्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 18 जनवरी को पूरा हो चुका है। इसके बाद से ये शहरी निकाय पिछले कई दिनों से निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना संचालित हो रहे थे।

राज्य सरकार ने आपदा का हवाला देते हुए पंचायतों के साथ-साथ नगर निकाय चुनाव भी फिलहाल टाल दिए थे। इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग तय समय पर चुनाव नहीं करवा सका और सरकार को प्रशासकों की नियुक्ति करनी पड़ी।
74 शहरी निकायों में से 45 का कार्यकाल पूरा
हिमाचल प्रदेश में कुल 74 शहरी निकाय हैं। इनमें से 45 का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जबकि शिमला नगर निगम को छोड़कर शेष निकायों का कार्यकाल मार्च-अप्रैल में पूरा हो जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में अन्य नगर निकायों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
हाईकोर्ट का आदेश, 30 अप्रैल से पहले हों चुनाव
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निकायों और पंचायतों के चुनाव 30 अप्रैल से पहले कराने के निर्देश दिए हैं। तब तक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति को जरूरी बताया गया है।
30 शहरी निकायों में तुरंत लागू हुई नई व्यवस्था
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार प्रदेश के 30 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। यह निर्णय हिमाचल प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1994 की धारा 268(1) के तहत लिया गया है।
इसके साथ ही संबंधित शहरी निकायों के एसडीओ (सिविल) को भी विशेष प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। एसडीओ अब ₹1 लाख से ₹5 लाख तक के विकास कार्यों को मंजूरी दे सकेंगे, जिससे जरूरी और छोटे विकास कार्यों में तेजी आएगी।
इन शहरी निकायों में हुई प्रशासक नियुक्ति
बिलासपुर, श्री नैना देवी जी, घुमारवीं, तलई, चंबा, डलहौजी, चुवाड़ी, सुजानपुर-टिहरा, नादौन, भोटा, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंदरनगर, नेरचौक, रिवालसर, करसोग, रोहड़ू और रामपुर सहित कई नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से शहरी निकायों में विकास कार्य, नागरिक सुविधाएं और प्रशासनिक निर्णय बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे।

