केंद्र सरकार ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए वीजा से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। गृह मंत्रालय की ओर से 5 नवंबर 2026 को जारी नए संशोधन आदेश के तहत धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को देश में आगे रहने के लिए उपयुक्त श्रेणी का वीजा प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
गृह मंत्रालय ने यह संशोधन इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेम्प्शन) ऑर्डर, 2025 में किया है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के ऐसे अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को छूट दी गई है, जो धार्मिक उत्पीड़न या उत्पीड़न की आशंका के कारण 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए थे। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के भारत पहुंचे थे अथवा जिनके दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी है। हालांकि, भारत में लगातार रहने के लिए उन्हें अब संबंधित श्रेणी का वीजा लेना होगा।
नए आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के विदेशी नागरिकों के लिए भी पासपोर्ट और वीजा संबंधी प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। इनमें कुछ पाकिस्तानी नागरिक, तिब्बती और पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय मूल के कुछ ऐसे लोगों को भी राहत दी गई है, जो मलेशिया या सिंगापुर की नागरिकता लेने के बाद भारत लौटे थे और जिनके पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है।
सरकार के इस संशोधन का उद्देश्य अलग-अलग श्रेणियों के विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश और प्रवास से जुड़े नियमों को स्पष्ट करना है। यह आदेश 5 नवंबर को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ लागू हो गया है।

