बद्रीनाथ के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद उत्तराखंड में चारधाम हवाई सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन के नियम सख्त कर दिए हैं। नए निर्देशों के तहत अब चारधाम की सभी चार्टर उड़ानों में दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य होगी। इसके साथ ही प्रत्येक उड़ान से पहले अलग से अनुमति लेनी होगी और हर लैंडिंग के बाद मौसम तथा उड़ान से संबंधित रिपोर्ट भी देनी होगी। इन नए नियमों का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ानों के दौरान होने वाले जोखिम को कम करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के मुताबिक, चारधाम यात्रा के दौरान संचालित होने वाली सभी चार्टर उड़ानों में दो पायलट मौजूद रहेंगे। इनमें मुख्य पायलट के साथ सह-पायलट की तैनाती भी जरूरी होगी। खास बात यह है कि सह-पायलट के लिए भी पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ान संचालन का प्रशिक्षण होना अनिवार्य किया गया है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में उड़ान के दौरान बेहतर निर्णय लेने और जोखिम से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हर उड़ान से पहले लेनी होगी अनुमति, लैंडिंग के बाद देनी होगी रिपोर्ट
हेलीकॉप्टर संचालन को लेकर दूसरा बड़ा बदलाव उड़ानों की अनुमति व्यवस्था में किया गया है। अब किसी भी हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने से पहले देहरादून के सहस्त्रधारा या सोनप्रयाग स्थित नियंत्रण कक्ष और यूकाडा से अपने गंतव्य तथा निर्धारित मार्ग की अनुमति लेनी होगी। पहले से निर्धारित कार्यक्रम के आधार पर उड़ान संचालित करने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी। एक धाम से दूसरे धाम जाने के दौरान भी प्रत्येक उड़ान के लिए अलग से अनुमति लेना जरूरी होगा। उदाहरण के तौर पर बद्रीनाथ से केदारनाथ जाने वाले हेलीकॉप्टर को भी नए सिरे से क्लियरेंस हासिल करना होगा।
इसके अलावा प्रत्येक लैंडिंग के बाद सह-पायलट को मौसम और उड़ान से जुड़ी लिखित रिपोर्ट देनी होगी। इसे पायलट रिपोर्ट (पीआईआरईपी) कहा जाता है। इस रिपोर्ट में संबंधित क्षेत्र के मौसम, हवा की स्थिति और उड़ान के दौरान सामने आई परिस्थितियों की जानकारी दर्ज होगी। नियंत्रण कक्ष इस रिपोर्ट का आकलन करने के बाद अगली उड़ान के लिए अनुमति देने का निर्णय लेगा। यानी अब एक उड़ान के बाद दूसरी उड़ान का संचालन मौसम और परिस्थितियों की समीक्षा के आधार पर किया जाएगा।
हालांकि, सुरक्षा के लिए लागू किए जा रहे इन नए नियमों को लेकर हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों में नाराजगी भी सामने आई है। हेली कंपनियों और ऑपरेटरों का कहना है कि प्रत्येक उड़ान में दो प्रशिक्षित पायलटों की अनिवार्य तैनाती से उनका परिचालन खर्च काफी बढ़ जाएगा। उनके मुताबिक, चारधाम जैसे सीमित अवधि वाले हवाई सेवा कारोबार में यह व्यवस्था आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।
ऑपरेटरों ने नए नियमों के विरोध में 2 नवंबर 2026 से चारधाम चार्टर सेवाएं निलंबित करने की चेतावनी दी है। ऐसे में सुरक्षा नियमों को सख्त करने के फैसले के साथ ही हेली सेवाओं के संचालन पर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन और हेली ऑपरेटरों के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है।

