देश की बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने जनसंख्या गणना का कार्यक्रम अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत देश के अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी। हालांकि, इस बार सभी राज्यों में एक साथ जनगणना नहीं होगी। अगले साल विधानसभा चुनाव वाले राज्यों और बर्फबारी से प्रभावित कुछ क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर प्रमुख हैं। भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से 30 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में जनगणना की तारीखों और संदर्भ तिथि की जानकारी दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक, निर्धारित कार्यक्रम के तहत होने वाली जनसंख्या गणना के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 की रात 12 बजे होगी। यानी इसी समय को आधार मानकर संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या का आधिकारिक आंकड़ा तैयार किया जाएगा।
इन राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर होगी जनगणना
जनगणना के नए कार्यक्रम में मणिपुर को फिलहाल शामिल नहीं किया गया है। यहां अगली घोषणा तक जनगणना की तारीख निर्धारित नहीं की गई है। इसके अलावा गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड को भी 25 जनवरी से 28 फरवरी वाले कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित होने के कारण पहले ही अलग कार्यक्रम जारी किया जा चुका है। केंद्र सरकार की पांच सितंबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित नहीं होने वाले क्षेत्रों में एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक घर-घर जनगणना की जाएगी। इसके बाद पांच से नौ जनवरी तक संशोधन का दौर चलेगा। इन राज्यों और संबंधित क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 निर्धारित की गई है। वहीं, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित ऐसे क्षेत्रों में भी अलग व्यवस्था रहेगी, जहां मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सामान्य समय पर जनगणना कराना संभव नहीं है। इन क्षेत्रों के लिए पहले जारी अधिसूचना में एक अक्टूबर 2026 को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई थी।
ऑनलाइन भी दे सकेंगे परिवार की जानकारी
जनगणना 2027 में लोगों को घर-घर आने वाली गणना टीम का इंतजार करने के बजाय स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कराने का विकल्प भी दिया गया है। इसके लिए 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस दौरान लोग निर्धारित ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से अपने परिवार और सदस्यों से संबंधित जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से घर-घर जाकर जनसंख्या गणना का काम शुरू होगा। अधिसूचना में एक से पांच मार्च 2027 तक पुनरीक्षण का दौर भी निर्धारित किया गया है। इस दौरान जनगणना से संबंधित दर्ज की गई जानकारियों की जांच और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि आंकड़ों में किसी तरह की त्रुटि न रह जाए। गौरतलब है कि भारत की जनगणना देश की आबादी, परिवारों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े आंकड़े जुटाने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों, संसाधनों के वितरण और भविष्य की नीतियां तैयार करने में किया जाता है। इस बार जनगणना का कार्यक्रम अलग-अलग क्षेत्रों की परिस्थितियों और चुनावी व्यस्तताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ऐसे में देश के सभी हिस्सों में जनगणना की प्रक्रिया अलग-अलग समय पर पूरी होगी।

