September 26, 2026
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उत्तराखंड

पहाड़ के गांवों तक पहुंचेगी विकास की सड़क, पीएमजीएसवाई-4 में 1490 गांवों को मिलेगी नई कनेक्टिविटी



उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय गांवों के लिए सड़क अब केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं तक पहुंच का जरिया बन रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत राज्य में अब तक तीन चरणों में 21,915 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर 1,860 गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। इन सड़कों के निर्माण पर करीब 11,595 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

सड़क संपर्क बेहतर होने से पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हुई है। विद्यार्थियों के लिए स्कूल और कॉलेज तक पहुंच आसान हुई है, वहीं आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी समय कम हुआ है। किसानों को अपनी उपज बाजार और मंडियों तक ले जाने में सुविधा मिली है। इसके साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को भी सड़क संपर्क का लाभ मिल रहा है।

उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सड़क निर्माण हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र और मौसम की बाधाओं के बावजूद पीएमजीएसवाई के माध्यम से राज्य में सड़क नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

अब पीएमजीएसवाई का चौथा चरण शुरू हो चुका है। पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम चक्र में राज्य के 309 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की प्रक्रिया तेज की गई है। इस चरण में 1,707 करोड़ रुपये की लागत से 1,228.20 किलोमीटर लंबी 184 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। इन सड़कों के पूरा होने के बाद कई ऐसे गांव मुख्य सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएंगे, जहां अभी भी लोगों को कठिन पहाड़ी रास्तों पर निर्भर रहना पड़ता है।

चौथे चरण में 1490 गांवों को जोड़ने की योजना

पीएमजीएसवाई-4 के तहत उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में कुल 1,490 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए 1,479 सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव है। इनकी कुल लंबाई 9,344 किलोमीटर होगी।

प्रथम चक्र में पौड़ी गढ़वाल के 68 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है। अल्मोड़ा और टिहरी के 47-47, बागेश्वर के 35, पिथौरागढ़ के 25 तथा नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24 गांव इसमें शामिल हैं। चमोली के 17, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 तथा हरिद्वार के दो गांवों को भी सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

पिथौरागढ़ में सबसे लंबा प्रस्तावित सड़क नेटवर्क

पीएमजीएसवाई-4 के तहत पिथौरागढ़ में 249 गांवों के लिए 1,819.6 किलोमीटर सड़क का प्रावधान किया गया है। अल्मोड़ा में 221 गांवों के लिए 1,395.5 किलोमीटर और पौड़ी में 185 गांवों के लिए 1,227.8 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है।

चमोली में 175 गांवों को 996.15 किलोमीटर, टिहरी में 168 गांवों को 941.5 किलोमीटर और उत्तरकाशी में 112 गांवों को 721.99 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। रुद्रप्रयाग में 111 गांवों के लिए 469.2 किलोमीटर, बागेश्वर में 101 गांवों के लिए 569.82 किलोमीटर और नैनीताल में 67 गांवों के लिए 399.55 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है।

इसके अलावा देहरादून में 52 गांवों को 390 किलोमीटर, चंपावत में 39 गांवों को 387.3 किलोमीटर, ऊधमसिंह नगर में नौ गांवों को 22.3 किलोमीटर और हरिद्वार में एक गांव को 3.1 किलोमीटर सड़क सुविधा मिलने का प्रस्ताव है।

सड़क संपर्क से कृषि और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में लगने वाला समय और परिवहन लागत कम होने की उम्मीद है। फल, सब्जियां, दुग्ध उत्पाद, हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सकता है।

पर्यटन के लिहाज से भी यह सड़क नेटवर्क महत्वपूर्ण है। नए पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से होम स्टे, परिवहन, खानपान और अन्य स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी ग्रामीण सड़कों की भूमिका अहम है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद मिलती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए सड़क सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित होती है। वहीं विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए लंबी दूरी पैदल तय करने की मजबूरी कम होती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार दूरदराज के सभी गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएमजीएसवाई के तहत बन रही सड़कों से दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क संपर्क को विकास की बुनियादी जरूरत माना जाता है। ऐसे में पीएमजीएसवाई-4 के तहत प्रस्तावित 9,344 किलोमीटर सड़क नेटवर्क से 1,490 गांवों को जोड़ने की योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। :::

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