आज मुंबई समेत देशभर में गणपति बप्पा की विदाई का भावुक पल है। अनंत चतुर्दशी के साथ गणेशोत्सव अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है और सुबह से ही भक्तों की आंखों में खुशी के साथ विदाई का दर्द भी दिखाई दे रहा है। ढोल-ताशों की गूंज, गणपति बप्पा मोरया के जयकारों और फूलों से सजे वाहनों के बीच गणेश प्रतिमाएं विसर्जन के लिए निकल रही हैं। मुंबई में यह दृश्य और भी खास है, क्योंकि यहां गणपति की विदाई केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शहर की सामूहिक भावनाओं का हिस्सा बन चुकी है।
मुंबई समेत देशभर में आज शुक्रवार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणपति विसर्जन किया जा रहा है। दस दिवसीय गणेशोत्सव के अंतिम दिन भक्त अपने आराध्य भगवान गणेश को भावुक विदाई दे रहे हैं। कहीं ढोल-ताशों के साथ गणपति की सवारी निकल रही है तो कहीं परिवार और मंडल के सदस्य आंखों में आंसू लिए बप्पा को अंतिम विदाई देने पहुंच रहे हैं। इस दौरान बार-बार एक ही जयघोष सुनाई दे रहा है । गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।
मुंबई में गणेश विसर्जन का सबसे बड़ा आकर्षण लालबागचा राजा की विसर्जन यात्रा है। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल इस साल अपना 93वां गणेशोत्सव मना रहा है। मंडल की ओर से बताया गया है कि लालबागचा राजा का विसर्जन शुक्रवार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा। विसर्जन यात्रा की तैयारियों को देखते हुए 24 सितंबर की सुबह छह बजे चरणस्पर्श दर्शन की कतार बंद कर दी गई थी, जबकि मुखदर्शन की कतार रात 11:59 बजे बंद की गई। इसके बाद मंडल ने विसर्जन यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया।
लालबाग की गलियों से निकलने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। बप्पा को विदाई देने के लिए भक्त घंटों इंतजार करते हैं। लालबाग, चिंचपोकली, भायखला और आसपास के इलाकों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल है। विशाल प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले मंडल के कार्यकर्ता और श्रद्धालु अंतिम तैयारियों में जुटे हैं। इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
मुंबई में केवल लालबागचा राजा ही नहीं, बल्कि मुंबईचा राजा, अंधेरीचा राजा, चिंचपोकलीचा चिंतामणी सहित कई प्रमुख गणपति मंडलों की प्रतिमाएं भी आज विसर्जन के लिए निकलेंगी। इन प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राएं अलग-अलग मार्गों से होकर समुद्र तटों और निर्धारित विसर्जन स्थलों तक पहुंचेंगी। मुंबई में गिरगांव चौपाटी, जुहू बीच, दादर चौपाटी सहित कई स्थानों पर विसर्जन की व्यवस्था की गई है। अनंत चतुर्दशी को मुंबई में सबसे अधिक भीड़ रहने की संभावना रहती है और विसर्जन यात्राएं देर रात तक जारी रहती हैं।
मुंबई में रातभर परिवहन और सुरक्षा की तैयारी
विसर्जन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए मुंबई की परिवहन व्यवस्था को भी अतिरिक्त रूप से तैयार किया गया है। मध्य रेलवे ने 25 और 26 सितंबर की रात 22 विशेष लोकल ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। ये विशेष सेवाएं मुंबई के प्रमुख मार्गों पर यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई जाएंगी।
मुंबई मेट्रो लाइन-3 को भी अनंत चतुर्दशी की रात श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरी रात चलाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य विसर्जन में शामिल होने वाले लोगों को देर रात और तड़के सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
इस बार गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में डेढ़ दिन, पांच दिन, छह दिन और सात दिन की अवधि में बड़ी संख्या में गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन पहले ही किया जा चुका है। बीएमसी के अनुसार, अब तक इन चरणों में कुल 1,63,386 गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया है। इनमें घरों में स्थापित गणपति प्रतिमाओं के साथ सार्वजनिक गणेश मंडलों की प्रतिमाएं भी शामिल हैं। अब अनंत चतुर्दशी के साथ उत्सव का सबसे बड़ा विसर्जन चरण शुरू हो गया है।
मुंबई में गणपति उत्सव की खासियत यह है कि यहां बप्पा की विदाई में पूरा शहर एक साथ दिखाई देता है। कई परिवारों में प्रतिमा के सामने अंतिम आरती की जाती है। महिलाएं और पुरुष फूलों की वर्षा करते हैं, बच्चे जयकारे लगाते हैं और युवा ढोल-ताशों की धुन पर नाचते हुए विसर्जन यात्रा में शामिल होते हैं। प्रतिमा जैसे-जैसे विसर्जन स्थल की ओर बढ़ती है, भक्तों की आंखें नम होती जाती हैं।
लालबागचा राजा के प्रति मुंबईवासियों की आस्था हर साल इस विदाई को और भव्य बना देती है। इस साल भी गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचे। मंडल को शुरुआती दिनों में ही करोड़ों रुपये का दान, सोना और चांदी प्राप्त हुआ था, जो इस गणपति के प्रति लोगों की आस्था और लोकप्रियता को दर्शाता है।
देश के दूसरे हिस्सों में भी आज गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों, तालाबों, झीलों और कृत्रिम विसर्जन कुंडों में किया जा रहा है। कई शहरों में प्रशासन ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम तालाब और विशेष विसर्जन कुंड बनाए हैं। श्रद्धालुओं से भी पर्यावरण अनुकूल तरीके से विसर्जन करने की अपील की गई है।
गणेशोत्सव का अंतिम दिन भक्तों के लिए खुशी और विरह दोनों का दिन होता है। दस दिनों तक घरों और पंडालों में विराजमान रहने वाले गणपति आज अपने भक्तों से विदा हो रहे हैं। मुंबई की सड़कों पर आज रात तक ढोल-ताशे बजते रहेंगे, जयकारे गूंजते रहेंगे और विसर्जन यात्राओं का सिलसिला चलता रहेगा। प्रतिमाएं भले ही जल में विलीन हो जाएंगी, लेकिन भक्तों का विश्वास है कि बप्पा अपने आशीर्वाद के साथ फिर अगले वर्ष लौटेंगे। यही उम्मीद हर विदाई को एक नई प्रतीक्षा में बदल देती है, गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

