ISRO Launched of LVM3-M4/CHANDRAYAAN-3 Mission Satish Dhawan Space Centre : भारत के लिए ऐतिहासिक पल : हमारे "बाहुबली रॉकेट" ने चंद्रमा पर भरी उड़ान, देश के मिशन को सफल करने के लिए मौके पर मौजूद हजारों लोगों ने ताली बजाकर बढ़ाया उत्साह,देखें लॉन्चिंग का रोमांचक वीडियो - Daily Lok Manch Launched of LVM3-M4/CHANDRAYAAN-3 Mission Satish Dhawan Space Centre
March 5, 2026
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ISRO Launched of LVM3-M4/CHANDRAYAAN-3 Mission Satish Dhawan Space Centre : भारत के लिए ऐतिहासिक पल : हमारे “बाहुबली रॉकेट” ने चंद्रमा पर भरी उड़ान, देश के मिशन को सफल करने के लिए मौके पर मौजूद हजारों लोगों ने ताली बजाकर बढ़ाया उत्साह,देखें लॉन्चिंग का रोमांचक वीडियो

भारत के लिए ऐतिहासिक पल : हमारे "बाहुबली रॉकेट" ने चंद्रमा पर भरी उड़ान, देश के मिशन को सफल करने के लिए मौके पर मौजूद हजारों लोगों ने ताली बजाकर बढ़ाया उत्साह,देखें लॉन्चिंग का रोमांचक वीडियो

आज एक अरब 35 करोड़ देशवासियों के लिए बहुत ही ऐतिहासिक दिन है। भारत ने एक बार फिर 4 साल बाद चंद्रमा पर उड़ान भरी है। ‌ भारत के इस मिशन को देखने के लिए दुनिया भर की नजर लगी हुई है। शुक्रवार आज 14 जुलाई दोपहर 2:35 पर आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रयान-3 बाहुबली रॉकेट LVM3-M4 से इसे स्पेस में भेजा गया। इसरो चेयरमैन एस सोमनाथत अन्य वैज्ञानिकों के साथ केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह समेत हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे। ‌चंद्रयान-3 को बाहुबली रॉकेट लेकर जाएगा और चंद्रमा की कक्षा में स्थापित कराएगा। अगर इसे बाहुबली कहा जा रहा था तो गलत भी नहीं है। आखिर इसका वजन 642 टन है यानि 130 हाथियों को एक साथ खड़ा कर दें तो उनके भार के बराबर। ऊंचाई कुतुबमीनार से कहीं ज्यादा। करीब 43.5 मीटर यानि 15 मंजिला मकान के बराबर है।

615 करोड़ की लागत से तैयार हुआ ये मिशन करीब 50 दिन की यात्रा के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग करेगा। ‘चंद्रयान-3’ को भेजने के लिए LVM-3 लॉन्चर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे पहले GSLV MK-III के नाम से जाना जाता था। इसी रॉकेट से स्पेस एजेंसी इसरो ने चंद्रयान-2 को लॉन्च किया था।

चंद्रयान की लॉन्चिंग देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे । वहीं विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के तौर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन सेंटर पहुंचे । इसके अलावा पूर्व इसरो चीफ राधाकृष्णन, के सिवन और एएस किरण कुमार भी चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग पर मौजूद थे।

चंद्रयान-3 पर काम 2020 में शुरू हुआ था जिसमें वैज्ञानिक और इंजीनियर इसके डिजाइन और योजना पर काम कर रहे थे। लेकिन कोविड-19 के आने के बाद इसे पूरी तरह तैयार करने में वक्त लग गया। बता दें कि चंद्रयान- 3 की सॉफ्ट लैंडिंग सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। चांद को लेकर हमारे पास बहुत ज़्यादा जानकारियां मौजूद नहीं हैं इसलिए यह जरूरी है कि चांद को जान पाएं।चंद्रयान-3 मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग का है। भारत का यह तीसरा चंद्र मिशन है, जबकि चंद्र सतह पर सुरक्षित लैंडिंग का दूसरा प्रयास है। इससे पहले केवल तीन ही देश अमेरिका, रूस और चीन चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करा सके हैं।

चार साल पहले 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के दौरान लैंडर के सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफलता नहीं मिल पाई थी। जिसे देखते हुए चंद्रयान-3 मिशन को भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है। माधवन नायर ने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने करीब चार साल पहले चंद्रयान-2 की सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान आई समस्या के समाधान के लिए कई उपाय किए थे और प्रणालियों को मजबूत किया था।
इसरो इससे पहले साल 2008 में चंद्रयान-1 और 2019 में चंद्रयान-2 लॉन्च कर चुका है। चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर के साथ-साथ लैंडर और रोवर भी थे। चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं होगा, सिर्फ लैंडर और रोवर ही रहेंगे। इसरो ने इस बार भी लैंडर का नाम ‘विक्रम’ और रोवर का ‘प्रज्ञान’ रखा है। चंद्रयान-2 में भी लैंडर और रोवर के यही नाम थे। चंद्रयान-3 को चंद्रयान-2 का फॉलोअप मिशन बताया जा रहा है। इसका मकसद भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराना है।

चंद्रयान-3 की सफलता काफी हद तक इसे लेकर जाने वाले बाहुबली रॉकेट लॉन्चर एलवीएम-3 पर टिकी है। लॉन्च व्हीकल मार्क-III को बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता है। पिछले साल अक्टूबर में एलवीएम-3 ने 36 सैटेलाइट को लेकर उड़ान भरी थी। इसके बाद से ही इस रॉकेट लॉन्चर को बाहुबली रॉकेट लॉन्चर कहा जाने लगा। इसरो को इसे बनाने में 15 साल का समय लगा था। यह इसरो द्वारा बनाया गया सबसे ताकतवर रॉकेट है। इस रॉकेट का इस्तेमाल हैवी लिफ्ट लॉन्च में किया जाता है। इस रॉकेट ने अभी तक के सभी मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। चंद्रयान-2 को भी इसी रॉकेट से लॉन्च किया गया था। चंद्रयान-3 इसका चौथा मिशन है। इसे बनाने में कुल 3,000 करोड़ रुपये का खर्च आया था।

यह पूरा मिशन 45 से 50 दिन का होगा। इसरो प्रमुख ने बताया है कि अगर मिशन प्लान के तहत चला तो 23-24 अगस्त को लैंडर और रोवर को चांद की सतह पर उतारने की कोशिश की जाएगी। अगर किसी कारण लैंडिंग में दिक्कत हुई तो सितम्बर महीने में फिर से लैंड कराने की कोशिश की जाएगी। चंद्रयान-3 की चांद पर लैंडिंग सफल रही तो भारत उन देशों के एलीट क्लब में शामिल हो जाएगा जो चांद तक पहुंचे। अब तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही यह कारनामा किया है।

चंद्रयान 3 के जरिए भारत चांद की स्‍टडी करना चाहता है। वो चांद से जुड़े तमाम रहस्‍यों से पर्दा हटाएगा। चंद्रयान 3 चांद की सतह की तस्वीरें भेजेगा, वहां के वातावरण, खनिज, मिट्टी वगैरह जुड़ी तमाम जानकारियों को जुटाएगा। बता दें 2008 में जब इसरो ने भारत का पहला चंद्र मिशन चंद्रयान-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, तब इसने चंद्रमा की परिक्रमा की और चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की खोज की थी। चंद्रयान 3 को कई स्‍तर पर अपग्रेड किया गया है, ताकि इस बार मिशन की सफलता को सुनिश्चित किया जा सके। इसके लिए पिछली बार की तुलना में लैंडर को मजबूत बनाया गया है। इसमें बड़े और शक्तिशाली सौर पैनल का इस्तेमाल किया गया है। चंद्रयान 3 की स्‍पीड को निर्धारित करने के लिए अतिरिक्त सेंसर लगाए गए हैं। कुल मिलाकर इस मिशन में हर गलती की गुंजाइश को खत्‍म करने का प्रयास किया गया है।

पीएम मोदी ने चंद्रयान-3 लॉन्च के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जहां तक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का सवाल है, 14 जुलाई 2023 हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा। चंद्रयान-3, हमारा तीसरा चंद्र मिशन, अपनी यात्रा पर निकलेगा। यह उल्लेखनीय मिशन हमारे राष्ट्र की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ाएगा।

प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा कि चंद्रयान-3 मिशन के लिए शुभकामनाएं! मैं आप सभी से इस मिशन और अंतरिक्ष, विज्ञान और इनोवेशन में हमने जो प्रगति की है, उसके बारे में और अधिक जानने का आग्रह करता हूं। इससे आप सभी को बहुत गर्व महसूस होगा।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने चंद्रयान-3 के लॉन्च को लेकर वैज्ञानिकों को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया कि आज का यह दिन, भारतीय इतिहास में एक विशेष महत्व का है। मिशन चंद्रयान-3 की लांचिंग, नये भारत की आकांक्षाओं को नया आकाश देने जा रही है। इस मिशन में हमारे देश के वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत, लगन, समर्पण और प्रतिबद्धता जुड़ी हुई है। यह मिशन सफल हो, इसके लिए इसरो की पूरी टीम को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चंद्रयान-3 मिशन को लेकर वैज्ञानिकों को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष की सीमाओं को आगे बढ़ाने वाला एक उल्लेखनीय मिशन है। यह मिशन हम सभी को बड़े सपने देखने और सितारों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेगा।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन है। चंद्रयान-3 मिशन के द्वारा भारत एक बार फिर चांद पर कदम रखने की कोशिश करेगा। इस मिशन से जुड़े सभी वैज्ञानिकों को और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की पूरी टीम के साथ-साथ और समस्त देशवासियों को अनंत शुभकामनाएं। उम्मीद है कि हम शीघ्र ही चांद पर भी तिरंगा फहराएंगे।

साल 2019 में भारत ने चंद्रमा पर चंद्रयान-2 भेजा था, लेकिन मिशन सफल नहीं हो सका–

चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को लॉन्च किया गया था, लेकिन 6-7 सितंबर को विक्रम लैंडर की क्रैश लैंडिंग हो गई थी। पूरा देश चंद्रयान के सफल लैंड कर जाने की उम्मीद में नजर गढ़ाए बैठा था। लेकिन आखिर के 15 मिनट में कुछ ऐसा हुआ कि यह सपना पूरा नहीं हो सका। 6 सितंबर 2019 को की दरमियानी रात जब लैंडर विक्रम की लैंडिंग में थोड़ा ही समय बचा था पीएम मोदी भी इसरो मुख्यालय में मौजूद थे। सबकी निगाहें उस पल पर थी जिसे पूरा करने के लिए देश ने सालों तक इंतजार किया है। बीच-बीच में पीएम मोदी को वरिष्ठ वैज्ञानिक ब्रीफ कर रहे थे। पहला रफ ब्रीफिंग फेज जब पूरा हुआ तब तालियों की गड़गड़ाहट को आसानी से सुना जा सकता था। अब लैंडर विक्रम की सतह से महज 7.4 किलोमीटर दूर था। जब दूसरे फेज में लैंडर विक्रम चांद की सतह से सिर्फ 300 मीटर दूर था, अचानक से टीवी पर नजर आ रहे वैज्ञानिकों के चेहरे मुरझा गए, खबर आई विक्रम की चांद पर हार्ड लैंडिंग हुई है। पीएम मोदी ने वहां मौजूद वैज्ञानिकों को हिम्मत दी और एक फिर अब भारत इस सपने को साकार करने के लिए तैयार दिखाई दे रहा है।

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