हिमाचल प्रदेश में मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके बाद शिमला सहित प्रदेश के सभी नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल पांच साल हो जाएगा। हालांकि इस फैसले को लेकर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
इस मुद्दे पर आज हिमाचल हाईकोर्ट में सुनवाई भी हुई। एक अधिवक्ता ने शिमला नगर निगम के मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने के फैसले को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। याचिका में अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है और अब केवल इसे राजपत्र में प्रकाशित किया जाना बाकी है, इसलिए फिलहाल इस याचिका में कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जब यह याचिका दायर की गई थी, उस समय ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं था जिसके आधार पर मेयर अपने ढाई साल के कार्यकाल से अधिक समय तक पद पर बने रह सकें। उनका कहना है कि नया कानून भविष्य में लागू हो सकता है, लेकिन मौजूदा मेयर के मामले में इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
दरअसल, शिमला के मौजूदा मेयर सुरेंद्र चौहान का ढाई साल का कार्यकाल 14 नवंबर 2025 को पूरा हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने अध्यादेश लाकर उनके कार्यकाल को 5 साल तक बढ़ा दिया था। इसी अध्यादेश के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। बाद में सरकार ने 4 दिसंबर 2025 को इस अध्यादेश से जुड़ा विधेयक विधानसभा में पारित कर राज्यपाल के पास भेज दिया था।
जनवरी 2026 में राज्यपाल ने कुछ आपत्तियों के साथ विधेयक को सरकार को वापस भेज दिया था। इसके बाद सरकार ने 16 फरवरी को इसे दोबारा विधानसभा में पेश किया और उसी दिन फिर से पारित कर राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेज दिया। अब राज्यपाल ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है। इसी मामले में पार्षद आशा शर्मा, कमलेश मेहता और सरोज ठाकुर ने भी याचिकाकर्ता बनने के लिए आवेदन किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंजली सोनी वर्मा ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए शहरी विकास विभाग, राज्य निर्वाचन आयोग और शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान को प्रतिवादी बनाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने एक व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से मेयर के कार्यकाल को 5 साल करने का अध्यादेश लाया।

