कोरोना काल के बाद दुनिया भर में भारतीय आयुर्वेदिक दवाओं की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। इसके चलते आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग में इज़ाफा हुआ है, जिससे औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और इस क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए आय व रोजगार के नए अवसर बने हैं। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने Health Budget 2026 में आयुष और आयुर्वेद सेक्टर के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। बजट में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने और आयुष फार्मेसी व औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं के उन्नयन का प्रावधान किया गया है।
तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान
मोदी सरकार ने पहले ही एम्स की तर्ज पर दिल्ली में पहला अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किया था। अब इसी मॉडल पर देश में तीन नए संस्थान खोले जाएंगे, जिससे आयुर्वेदिक चिकित्सा की शिक्षा, शोध और इलाज को मजबूती मिलेगी।
साक्ष्य-आधारित शोध पर ज़ोर आयुर्वेदिक दवाओं की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी वैज्ञानिक उपयोगिता को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का उन्नयन कर वहां आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक दवाओं पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, दवाओं के निर्माण, प्रशिक्षण और जागरूकता पर भी फोकस रहेगा।
औषधीय पौधों की खेती करने वालों की सराहना
वित्त मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक दवाओं के निर्यात में औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और उनके प्रसंस्करण से जुड़े युवाओं की भूमिका की सराहना की। हालांकि, बजट में इनके लिए किसी प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता या नई प्रोत्साहन योजना का ऐलान नहीं किया गया।

