मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन INDIA आज (रविवार) दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली कर रहा है। इस रैली के जरिए विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेगा। कांग्रेस सहित गठबंधन में शामिल 20 से अधिक विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के इसमें शामिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस ने रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया है।
रैली ऐसे समय हो रही है, जब देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों और नामों को हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को भी इस विरोध प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
इससे पहले 31 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक जन महाभियोग की कार्यवाही भी की थी। इसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। खड़गे ने प्रस्ताव पेश किया, जबकि राहुल गांधी ने समापन भाषण दिया। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगाए। हालांकि चुनाव आयोग और भाजपा विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
राहुल गांधी के नेतृत्व में निकलेगा ‘चलो दिल्ली’ मार्च, पुलिस ने की सुरक्षा व्यवस्था
महारैली से पहले दोपहर 12 बजे कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से रामलीला मैदान तक ‘चलो दिल्ली’ मार्च निकालने का कार्यक्रम है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से इस मार्च और महारैली में शामिल होने की अपील की है। मार्च में विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। इसके बाद रामलीला मैदान में मुख्य सभा होगी। रैली को राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं द्वारा संबोधित किए जाने की संभावना है।
हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस की अनुमति पर भी स्थिति स्पष्ट हुई है। पुलिस ने रामलीला मैदान में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सभा आयोजित करने की अनुमति दी है, लेकिन कनॉट प्लेस से मिंटो रोड होते हुए मैदान तक प्रस्तावित मार्च के लिए अलग से औपचारिक अनुमति नहीं मांगे जाने की बात पुलिस अधिकारियों ने कही थी। दूसरी ओर, पुलिस ने कार्यक्रम के मद्देनजर मार्च के रास्ते पर सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की तैयारी की है।
रैली में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। रामलीला मैदान को सुरक्षा के लिहाज से 14 जोन में बांटा गया है। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और पुलिसकर्मियों के शरीर पर लगे कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था में चार हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जबकि व्यापक सुरक्षा प्रबंधों में अर्धसैनिक बल भी शामिल हैं।
दिल्ली के 21 बाजारों पर पड़ सकता है असर, यातायात के लिए विशेष इंतजाम
महारैली का असर दिल्ली के कारोबार और यातायात पर भी पड़ने की आशंका है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने पहले ही कांग्रेस नेतृत्व से रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की थी। व्यापारिक संगठन के मुताबिक रामलीला मैदान के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, चावड़ी बाजार और भागीरथ पैलेस समेत 21 प्रमुख थोक एवं खुदरा बाजारों के कारोबार पर असर पड़ सकता है। व्यापारियों ने आशंका जताई थी कि बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होगी और जाम की स्थिति बन सकती है।
दिल्ली यातायात पुलिस ने भी रैली को देखते हुए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन लागू करने की सूचना जारी की है। आईटीओ, दिल्ली गेट, राजघाट, अजमेरी गेट, मिंटो रोड, तुर्कमान गेट और बाराखंभा रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। पुलिस ने वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी है।
रैली को लेकर विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव भी तेज होने के आसार हैं। विपक्ष जहां इसे मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, वहीं भाजपा और चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं। अब सभी की नजरें रामलीला मैदान की इस महारैली पर हैं, जहां विपक्षी दल अपनी एकजुटता दिखाने के साथ चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की रणनीति का भी संकेत दे सकते हैं।

