प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पूर्वी दिल्ली में आईपी एक्सटेंशन के डीडीए उत्सव ग्राउंड में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत सियावर रामचंद्र के जयकारे से की। उन्होंने कहा कि विजयादशमी के इस पवित्र वातावरण में मैं सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आज भारत का कोना-कोना राममय है। गांव-गांव और शहर-शहर रामलीला के रंग में देश डूबा हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशभर में रामलीलाओं का मंचन, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष और असत्य पर सत्य सनातन की विजय का विश्वास, हमारे लिए ये केवल त्योहार नहीं हैं, ये भारत की प्राण ऊर्जा हैं। इसलिए आज जब देश का जन-जन अधर्म पर धर्म की विजय का उद्घोष कर रहा है तो फिर सियावर रामचंद्र का जयकारा लगाते हैं। इस देश ने इसकी संस्कृति और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है। ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षसराज रावण का अंत किया, ये आस्था इसलिए भी है कि प्रभु श्रीराम ने हमें ऐसे आदर्श दिए, जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय हैं।

उन्होंने आगे कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन में कितनी ही कठिनाइयों का सामना किया। लेकिन, उन्होंने सच्चाई और नीति का हाथ कभी नहीं छोड़ा। उनका चरित्र ही ऐसा है कि प्रभुराम के चेहरे पर न राजपद पाने की प्रसन्नता हुई और न वनवास जाने पर उन्हें कोई दुख हुआ। उन्होंने हर संकट को सहकर भी धर्म का पालन किया और सत्य की स्थापना की। जब हमारे राम जंगल गए तो वहां उन्होंने निषादराज को गले लगाया, माता सबरी को सम्मान दिया। उन्होंने दया, करुणा, प्रेम और सौहार्द को मानदंड बनाया। जब वापस आकर राम अयोध्या के राजा बने तो उन्होंने एक ऐसे रामराज्य की स्थापना की, जो आज भी सुशासन का मानदंड माना जाता है। रामराज्य अर्थात ऐसा शासन जहां किसी के प्रति भेदभाव न हो, जहां सबको न्याय मिले, जहां सबको समान अवसर मिले, जहां सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, जनकल्याण का हो। इसलिए ही गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था कि यही मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमेशा जनता को जनार्दन मानकर आगे बढ़ना है। हमें गरीब और वंचित की सेवा को सर्वोपरि रखना है। प्रभुराम के जीवन से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है। संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हमें दूसरे के भरोसे नहीं बैठना है। हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है, अपने संसाधनों पर विश्वास करना है। अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है। प्रभुराम ने हमें सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। समुद्र सामने था, लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था इसलिए रामजी ने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया, जनभागीदारी को अपना संबल बनाया, उपलब्ध संसाधनों को जोड़ा और असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया, यही सफलता का मूलमंत्र है। अपनी शक्ति पर विश्वास, अपने सामर्थ्य पर भरोसा और अपने संसाधनों का सही उपयोग और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट संकल्प, आज हमें भी इसी मंत्र को लेकर आगे बढना है।
उन्होंने कहा कि हमारे सामने विकसित भारत का लक्ष्य है, हमारे सामने आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य है। हमें जनशक्ति से जनकल्याण करते हुए जनता की हर आकांक्षा को पूरा करना है। एक राष्ट्र तभी प्रगति करता है, जब उसके पास आत्मसम्मान का भाव होता है। उस आत्मसम्मान में सबसे बड़ी भूमिका उसकी विरासत की होती है। यही वजह है कि आज देश अपनी विरासत और पहचान को भी संरक्षित करने में जुटा है।
और इस आत्मसम्मान में बहुत बड़ी भूमिका उसकी विरासत की होती है। इसलिए, आज देश अपनी विरासत और पहचान को भी संरक्षित करने में जुटा है।
पीएम मोदी ने कहा कि सदियों तक हमारी धरोहरों को लूटकर विदेश ले जाया गया, लेकिन आज हम अपनी उन धरोहरों को वापिस ला रहे हैं। बीते 12 वर्षों में साढ़े छह सौ से ज्यादा प्राचीन मूर्तियों को भारत वापिस लाया गया है। इसी तरह, भारत अपने सांस्कृतिक केन्द्रों को दुनिया में नई पहचान दिलवा रहा है। बीते वर्षों में, हमारे कितने ही स्थानों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की लिस्ट में शामिल किया गया है। पिछले साल दीपावली को भी यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया है। ये करोड़ों भारतीयों की सामूहिक इच्छाशक्ति का ही परिणाम है। हमें इसी निष्ठा से आगे भी काम करना है।

