Uttarakhand DIPR
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October 15, 2026
Daily Lok Manch
राष्ट्रीय

2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की कवायद तेज, 17 राज्यों में चलेगा विशेष अभियान

चुनाव आयोग ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आयोग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का निर्देश दिया है। इसके तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे, पहले से दर्ज नामों और अन्य जानकारियों में गलतियां सुधारी जाएंगी तथा पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए आवेदन का अवसर दिया जाएगा। खास बात यह है कि वर्ष 2027 में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए पहले से आवेदन कर सकेंगे।
यह प्रक्रिया ऐसे समय में शुरू की जा रही है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक विवाद और विरोध देखने को मिला है। SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया गया है। ऐसे में नए पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, गलतियां सुधारने और पात्र लोगों को शामिल करने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।


युवाओं को मिलेगा पहले से आवेदन का मौका


चुनाव आयोग के अनुसार, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। इसके तहत पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने, मतदाता पहचान से जुड़ी जानकारियों में सुधार करने और आवश्यक संशोधन करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भी इसमें शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नियमों के तहत 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के साथ-साथ 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष के होने वाले युवा भी पहले से आवेदन कर सकेंगे। इससे निर्धारित तारीखों पर पात्रता पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

12 नवंबर को जारी होगी मतदाता सूची की प्रारूप प्रति


चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण के लिए समय-सारिणी भी तय की है। इसके तहत 2 नवंबर 2026 तक मतदान केंद्रों की व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद 12 नवंबर को मतदाता सूची की प्रारूप प्रति जारी की जाएगी।
प्रारूप सूची में किसी मतदाता का नाम छूटने, गलत जानकारी दर्ज होने या किसी अन्य त्रुटि की स्थिति में 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद 4 जनवरी 2027 को मतदाता सूची की अंतिम प्रति प्रकाशित की जाएगी।


पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले अहम प्रक्रिया


वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन पांचों राज्यों में भी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराया जाएगा। ऐसे में चुनाव से पहले मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की यह प्रक्रिया राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों ही लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 सीटें हैं और इसका कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। वहीं, मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 सीटों वाली विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर पूरा होगा।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले भी चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसे में चुनावी कार्यक्रम से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण आयोग के लिए अहम जिम्मेदारी होगी। मतदाताओं के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे प्रारूप सूची में अपना नाम और दर्ज विवरण जांच लें, ताकि किसी तरह की त्रुटि होने पर तय समय के भीतर सुधार के लिए दावा या आपत्ति दर्ज करा सकें।

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