October 3, 2026
Daily Lok Manch
हेल्थ

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, कम उम्र में सिरोसिस की आशंका ने बढ़ाई चिंता




फैटी लिवर की समस्या अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। अस्वास्थ्यकर खानपान, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण कम उम्र में ही लिवर में चर्बी जमा होने के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं, जिससे आगे चलकर लिवर सिरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।

25-26 साल की उम्र में ग्रेड-2 फैटी लिवर

विशेषज्ञों के मुताबिक, 25 से 26 वर्ष की उम्र में ग्रेड-2 फैटी लिवर का पता चलना अब असामान्य नहीं माना जा रहा है। हालांकि, फैटी लिवर के सभी मामलों में सिरोसिस विकसित नहीं होता, लेकिन बीमारी की अनदेखी करने और जोखिम कारकों पर नियंत्रण नहीं रखने से स्थिति गंभीर हो सकती है। लिवर में लगातार चर्बी जमा होने से सूजन पैदा हो सकती है। कुछ मरीजों में यह स्थिति फाइब्रोसिस में बदल जाती है, जिसमें लिवर के ऊतकों पर निशान बनने लगते हैं। फाइब्रोसिस के गंभीर होने पर लिवर को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और सिरोसिस की आशंका बढ़ जाती है।

मधुमेह और उच्च रक्तचाप भी बढ़ाते हैं खतरा

युवाओं में फैटी लिवर के बढ़ते मामलों और इससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी 2026 में भी चर्चा हो रही है। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आइएलबीएस) के प्रोफेसर डॉ. अनूप सराया के अनुसार, युवाओं में फैटी लिवर का संबंध केवल मोटापे से नहीं है, बल्कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी मेटाबोलिक समस्याएं भी इसके जोखिम को बढ़ाती हैं।

फास्ट फूड, अधिक कैलोरी वाला भोजन, मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन तथा लंबे समय तक बैठे रहने की आदत लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि सामान्य वजन वाले युवाओं को भी खानपान और जीवनशैली के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।

जीवनशैली में बदलाव से बचाव संभव

विशेषज्ञों के अनुसार, फैटी लिवर के जोखिम को कम करने के लिए संतुलित आहार अपनाना, वजन को नियंत्रित रखना और नियमित शारीरिक गतिविधियां करना जरूरी है। भोजन में फल, सब्जियां और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने के साथ अधिक चीनी और कैलोरी वाले भोजन से दूरी बनानी चाहिए। नियमित व्यायाम और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना भी लाभकारी है।

इसके अलावा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं को नियंत्रित रखना तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच कराना महत्वपूर्ण है। समय रहते फैटी लिवर की पहचान और जीवनशैली में सुधार से बीमारी के बढ़ने के जोखिम को कम किया जा सकता है।

Leave a Comment