October 2, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

वन्यजीव संघर्ष में दूसरों की जान बचाने वाले 18 साहसियों को सम्मान, CM धामी ने की ₹51 हजार देने की घोषणा



मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित एफआरआई परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वन्यजीव सप्ताह-2026 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने वन्यजीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने और अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने वाले 18 लोगों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित लोगों को ₹51-51 हजार की धनराशि देने की भी घोषणा की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण और फोटोग्राफी पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने वन्यजीवों पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रत्येक जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान करने और उसकी प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में चिड़ियाघर की स्थापना की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। इस परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि यह वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न अंग हैं। सनातन संस्कृति मानव और जीव-जगत के बीच सह-अस्तित्व का संदेश देती है। उत्तराखण्ड हिमालय, घने जंगलों, नदियों, झीलों और समृद्ध जैव विविधता से परिपूर्ण है। जिम कॉर्बेट और राजाजी जैसे राष्ट्रीय उद्यान राज्य की पहचान हैं, जहां प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। सरकार का प्रयास प्रकृति के संरक्षण के साथ वन्यजीव पर्यटन और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है, जिससे स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ सकें।

उन्होंने कहा कि वन्यजीव सप्ताह के दौरान प्रदेशभर में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार विकास परियोजनाओं के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रही है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर इसका उदाहरण है। सरकार का संकल्प है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहें और उनके आवागमन के रास्ते बाधित न हों।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। इसके अलावा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग को तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे हिम तेंदुओं के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकेंगे।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने जंगलों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक लाख युवाओं को ‘सीएम यंग ईको-प्रिन्योर’ बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके तहत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वन्यजीव फोटोग्राफर और इको-टूरिज्म से जुड़े कौशल को रोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों को प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रत्येक जिले में ईको क्लब के माध्यम से शैक्षिक यात्राएं भी आयोजित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन LiFE’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। साथ ही, ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) के माध्यम से जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन की पहल का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के साथ संघर्ष से प्रभावित नागरिकों की सहायता करना भी सरकार की प्राथमिकता है। वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख किया गया है। वहीं, वन्यजीव हमले में घायल होने वाले लोगों के उपचार का खर्च भी राज्य सरकार वहन कर रही है।

उन्होंने पर्यटकों से जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यानों और धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक न छोड़ने और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी रखने की अपील की।

कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक सविता कपूर, राजीव तलवार, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

Leave a Comment