आज सितंबर का महीना खत्म हो चुका है और 1 अक्टूबर की शुरुआत हो गई है। हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कुछ न कुछ बदलाव लेकर आती है। इस बार भी देशभर में आम लोगों की रसोई, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, खरीदारी और कर्ज से जुड़े कई अहम बदलाव हुए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत से जुड़ा है। तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं। अलग-अलग शहरों में यह बढ़ोतरी करीब 70 रुपये तक है। दिल्ली में कीमत 62.50 रुपये बढ़कर 2,810 रुपये हो गई है, जबकि कुछ शहरों में बढ़ोतरी इससे ज्यादा है।
इसके अलावा घरेलू एलपीजी पर सब्सिडी पाने वालों के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण यानी ई-केवाईसी से जुड़ा नियम लागू हो गया है। वहीं 15 अक्टूबर से चुनिंदा बड़े मर्चेंट के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने वाला है। एसबीआई के सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम से मुफ्त लेनदेन की सीमा घटाकर पांच कर दी गई है। इसी के साथ एसी, एलईडी टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे सामान भी महंगे होने जा रहे हैं। उधर रिजर्व बैंक की अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर भी सबकी नजर है, क्योंकि रेपो रेट में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
कमर्शियल सिलेंडर से लेकर रेपो रेट तक, जानिए 1 अक्टूबर के 6 बड़े बदलाव
1. कमर्शियल सिलेंडर हुआ महंगा
1 अक्टूबर से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। अलग-अलग शहरों में कीमत करीब 70 रुपये तक बढ़ी है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 62.50 रुपये महंगा होकर 2,810 रुपये का हो गया है। मुंबई में इसकी कीमत 2,764 रुपये और चेन्नई में 2,983 रुपये हो गई है। पटना में बढ़ोतरी 71.50 रुपये रही और वहां कीमत 3,100.50 रुपये पहुंच गई है।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे और कैटरिंग कारोबार पर पड़ सकता है। कारोबारियों की लागत बढ़ने के कारण चाय-नाश्ते से लेकर शादी और अन्य कार्यक्रमों की कैटरिंग तक की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत इस बदलाव में अलग है।
2. LPG सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी
1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी रिफिल की बुकिंग के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा होना जरूरी कर दिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 27.43 करोड़ यानी 89.9 प्रतिशत उपभोक्ता पहले ही यह प्रमाणीकरण पूरा कर चुके हैं और उन्हें अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं है।
जिन ग्राहकों का बायोमेट्रिक सत्यापन अभी पूरा नहीं हुआ है, उन्हें सब्सिडी वाले दाम पर रिफिल लेने के लिए पहले यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रमाणीकरण डिलीवरी के समय, गैस वितरक के कार्यालय या संबंधित तेल कंपनी के मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा सकता है।
3. 15 अक्टूबर से चुनिंदा बड़े UPI मर्चेंट पर MDR
डिजिटल भुगतान से जुड़ा एक अहम बदलाव 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है। 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होगा। जिन छोटे दुकानदारों की महीने में यूपीआई से कुल प्राप्ति 1 लाख रुपये तक है, उनके लिए दिए गए नियम के अनुसार लेनदेन मुफ्त रहेगा, भले ही किसी एक भुगतान की राशि 2,000 रुपये से अधिक हो। पर्सन-टू-पर्सन यूपीआई लेनदेन पर इसका असर नहीं बताया गया है।
यानी सामान्य ग्राहक के लिए यूपीआई भुगतान की प्रक्रिया में सीधे कोई नया शुल्क नहीं जुड़ रहा है। इसका मुख्य असर पात्र मर्चेंट के भुगतान ढांचे पर होगा।
4. SBI के सैलरी खाताधारकों के ATM नियम बदले
भारतीय स्टेट बैंक ने सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम और एडीब्ल्यूएम से मुफ्त लेनदेन की सीमा घटा दी है। 1 अक्टूबर से ऐसे खाताधारकों को दूसरे बैंक के एटीएम पर महीने में पांच मुफ्त लेनदेन मिलेंगे। पहले यह सीमा 10 लेनदेन थी।
मुफ्त सीमा खत्म होने के बाद लागू शुल्क देना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अतिरिक्त लेनदेन पर 15 रुपये और उस पर जीएसटी लगाया जाएगा। इसमें नकद निकासी के साथ अन्य निर्धारित एटीएम लेनदेन भी शामिल हो सकते हैं।
5. AC, TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन महंगे होने की तैयारी
त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। 1 अक्टूबर से कई कंपनियां एसी, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और अन्य उपकरणों की कीमतों में करीब 5 से 8 प्रतिशत तक वृद्धि कर रही हैं। यह इस साल उद्योग की ओर से कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी बताई जा रही है।
कंपनियों की लागत बढ़ने के पीछे तांबा, स्टील, एल्युमीनियम और कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की कीमतों के साथ माल ढुलाई लागत और मुद्रा विनिमय में उतार-चढ़ाव जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि त्योहारों के दौरान ग्राहकों को तत्काल पूरी बढ़ोतरी का असर हर उत्पाद पर नहीं दिख सकता, क्योंकि डीलरों के पास पहले खरीदा गया पुराना स्टॉक मौजूद है।
6. रेपो रेट पर 7 अक्टूबर को फैसला
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होगी। 7 अक्टूबर को रेपो रेट पर फैसला सामने आएगा। अगस्त की समीक्षा के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर कायम है।
इस बार बाजार में 0.25 प्रतिशत यानी 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की संभावना को लेकर चर्चा है। हालांकि अंतिम फैसला आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ही करेगी। अगर रेपो रेट बढ़ता है तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है और नई या फ्लोटिंग दर वाली ईएमआई महंगी हो सकती है। इसके विपरीत रेपो रेट में कटौती होने पर कर्ज की लागत कम होने की संभावना रहती है।
इस तरह अक्टूबर की शुरुआत में ही रसोई गैस, सब्सिडी, डिजिटल भुगतान, एटीएम इस्तेमाल, इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदारी और बैंक ब्याज दरों से जुड़े कई बदलाव सामने आए हैं। इनका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होगा, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की कीमत, एलपीजी सब्सिडी का सत्यापन और बैंकिंग से जुड़े नए नियम कारोबारियों तथा उपभोक्ताओं के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं।

