September 20, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

मां नंदा की बड़ी जात में भावुक पल, होमकुंड से चौसिंग्या खाडू की कैलाश के लिए विदाई, 21 सितंबर को सुतोल पहुंचेगी यात्रा



हिमालय स्थित होमकुंड में रविवार को मां नंदादेवी की बड़ी जात के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिला। मां नंदा की डोली और छंतोली के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूजा संपन्न होने के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार चौसिंग्या खाडू (चार सींगों वाले मेढ़े) को कैलाश की ओर विदा किया गया। खाडू की विदाई के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरा क्षेत्र मां नंदा के जयकारों और पारंपरिक लोकगीतों से गूंज उठा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होमकुंड में पूजा के बाद चौसिंग्या खाडू को मां नंदा के गहने, वस्त्र और पोटली बांधी जाती है। इसके बाद उसे अकेले ही हिमालय के निर्जन क्षेत्र की ओर रवाना किया जाता है। मान्यता है कि चौसिंग्या खाडू मां नंदा का संदेश लेकर कैलाश की ओर जाता है। इसकी विदाई को स्थानीय लोग बेटी की विदाई के समान भावुक परंपरा से जोड़कर देखते हैं। खाडू की विदाई के बाद देव डोलियां और श्रद्धालु जामुन डाली पड़ाव लौट आए।

### 21 सितंबर को सुतोल पहुंचेगी बड़ी जात

मां नंदादेवी की बड़ी जात यात्रा का अगला पड़ाव सुतोल होगा, जहां यात्रा 21 सितंबर को पहुंचेगी। इसके बाद 22 सितंबर को सुतोल से फरखेत के लिए प्रस्थान किया जाएगा। यहां रात्रि विश्राम के बाद 23 सितंबर को मां नंदा की मूर्ति को कुरूड़ स्थित नंदादेवी मूर्ति थान में स्थापित किया जाएगा।

नंदानगर के राकेश नेगी और हीरा सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धालुओं से सुतोल पहुंचने की अपील की है। वहीं, नंदानगर में जयकृष्ण भट्ट और उनके परिवार की ओर से तीन दिन तक भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भोजन की व्यवस्था रहेगी।

### उलंग्रा पहुंची बधाण की डोली और नंदा लोकजात

उधर, वेदनी में सप्तमी की जात पूरी होने के बाद रविवार को बधाण की डोली और नंदा लोकजात उलंग्रा गांव पहुंची। बमणबेरा में ग्रामीणों ने डोली और पुजारियों का पारंपरिक मांगलगीत और झोड़ा नृत्य के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

### 25 सितंबर को देवराड़ा मंदिर में होगी पूजा

लोकजात यात्रा के अगले चरण में सोमवार को डोली और नंदा लोकजात हाटकल्याणी, इच्छोली और अठ्ठू गांव से होते हुए बेराधार पहुंचेगी। इसके बाद 25 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी।

पूजा संपन्न होने के बाद मां नंदा की डोली अगले छह महीने के लिए देवराड़ा मंदिर में विराजमान रहेगी। इस दौरान श्रद्धालु मां नंदा के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

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